जबरदस्त बिजली संकट झेल चुके प्रदेश के लोगों पर अब बिजली के बिलों में फ्यूल चार्ज लगकर आएगा। उपभोक्ताओं पर बिजली की खपत के आधार पर फ्यूल चार्ज में 12 से 24 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई है। हरियाणा विद्युत नियामक आयोग का यह फैसला एक जुलाई से लागू माना जाएगा। इससे पूर्व अप्रैल माह में बिजली के दामों में वृद्धि हुई थी राज्य में फ्यूल सरचार्ज एडजस्टमेंट (एफएसए) बढ़ाने का प्रस्ताव हरियाणा की बिजली वितरण कंपनियों की तरफ से दिया गया है, जिसे राज्य विद्युत नियामक आयोग ने मंजूर कर लिया। फ्यूल चार्ज बढ़ने से अब 40 यूनिट तक बिजली की खपत करने वालों से सरचार्ज के रूप में 12 पैसे प्रति यूनिट अतिरिक्त वसूला जाएगा, जबकि 41 से 50 यूनिट की खपत पर 19 पैसे प्रति यूनिट की वसूली की जाएगी। इसके अलावा 400 यूनिट तक की खपत करने वालों से 23 पैसे प्रति यूनिट और 400 यूनिट से ज्यादा खपत करने पर 24 पैसे प्रति यूनिट सरचार्ज वसूला जाएगा। यह वह वसूली है जो बिजली साल 2010-11 में इस्तेमाल की गई थी। मौजूदा सरचार्ज अगले 24 महीनों तक वसूला जाएगा। बिजली की दरों में फ्यूल सरचार्ज के नाम पर उपभोक्ताओं पर 1087 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ डाला गया है। पहले ही बिजली की दरों में बढ़ोतरी कर इस साल 1795 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ उपभोक्ताओं पर डाला जा चुका है। इतना ही नहीं फ्यूल सरचार्ज के नाम पर उपभोक्ताओं से 15 पैसे प्रति यूनिट से लेकर 36 पैसे प्रति यूनिट तक पहले ही वसूली की जा रही है और मौजूदा बढ़ोतरी इसके अलावा की गई है। इनेलो के प्रधान महासचिव डा. अजय सिंह चौटाला ने बिजली की दरों में फ्यूल सरचार्ज के नाम पर उपभोक्ताओं पर डाले गए 1087 करोड़ रुपये के अतिरिक्त बोझ को प्रदेश की जनता के साथ धोखा बताते हुए इसे तुरंत वापस लिए जाने की मांग की है। भाजपा विधायक दल के नेता अनिल विज ने बिजली की दरों में बढ़ोतरी का विरोध करते हुए कहा कि सरकार द्वारा ताप बिजली घरों के निर्माण में किए गए घोटालों की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए और फ्यूल सरचार्ज के नाम पर लोगों पर डाला गया अतिरिक्त बोझ तुरंत वापस किया जाए अन्यथा पार्टी इसे सहन नहीं करेगी। हरियाणा के बिजली मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव का कहना है कि बिजली उपभोक्ताओं से यूज सरचार्ज वसूली की स्वीकृति हरियाणा विद्युत विनयामक आयोग ने दी है। इसलिए बिजली दरों में वृद्धि का आरोप सरकार पर लगाना ठीक नहीं है। आयोग स्वतंत्र इकाई है।
Thursday, July 12, 2012
केंद्र सरकार ने यूपी को दिया 50 हजार करोड़ का तोहफा
राष्ट्रपति चुनाव में केंद्र के साथ ममता बनर्जी की आंखमिचौली ने सपा से उसकी दोस्ती और पक्की कर दी है। शायद यही वजह है कि बारिश के इस खुशगवार मौसम में केंद्र ने भी अखिलेश सरकार पर दिल खोलकर धन की बारिश कर दी है। मायावती सरकार जिस केंद्र से पांच साल तक प्रदेश के लिए 80 हजार करोड़ का विशेष पैकेज मांगती रह गई, उसी केंद्र से अखिलेश सरकार ने महज तीन घंटे में 50 हजार करोड़ से अधिक की मदद के लिए हां करवा ली। बीते पांच साल के इतिहास में मंगलवार को यह पहला मौका था, जब केंद्र और उप्र के लगभग दो दर्जन अफसरों ने प्रधानमंत्री कार्यालय में तीन घंटे तक सिर्फ उत्तर प्रदेश के विकास के लिए खजाना खोलने के रास्तों पर माथापच्ची की। प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव पुलक चटर्जी, उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव जावेद उस्मानी और कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक रंजन की मौजूदगी में हुई इस बैठक में तमाम योजनाओं और कार्यक्रमों में केंद्रीय सहायता के लिए हरी झंडी मिल गई। अखिलेश ने अप्रैल में ही प्रधानमंत्री से मिलकर प्रदेश के विकास के लिए उन्हें 38 पत्र सौंपकर मदद की गुहार की थी। ये मांगें लगभग 93 हजार करोड़ की थीं। सूत्रों की मानें तो उनमें 50 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की मांगों को केंद्र ने हरी झंडी दे दी है। जो बाकी मांगें हैं, उन्हें भी 12वीं पंचवर्षीय योजना में पूरा करने का भरोसा दिया है। बड़े फैसलों में सिंचाई के मद्देनजर केंद्र ने एक झटके में ही 7270 करोड़ रुपये की सरयू नहर परियोजना व 319 करोड़ रुपये की शारदा सहायक क्षमता पुनस्र्थापना परियोजना को राष्ट्रीय योजना घोषित करने की हामी भर दी। अब इस खर्च का 90 प्रतिशत बोझ केंद्र व दस प्रतिशत उत्तर प्रदेश सरकार उठाएगी। केंद्र ने अखिलेश की मांग पर राज्य में नौ नए विश्वविद्यालयों को खोलने के लिए मदद पर रजामंदी दे दी है। अनुसूचित जाति के छात्रों के वजीफे के लिए प्रदेश ने 4500 करोड़ मांगे थे। केंद्र वह भी देगा। साथ ही रायबरेली (लालगंज) में एम्स के लिए जमीन की पड़ताल के लिए जल्द ही केंद्रीय टीम भेजने का भरोसा दिया है। अखिलेश ने 2013 में इलाहाबाद कुंभ मेले के लिए चार सौ करोड़ रुपये मांगे थे। सूत्र बताते हैं कि इस मद में पांच सौ से छह सौ करोड़ रुपये भी मिल सकते हैं। कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक रंजन मानते हैं कि केंद्र के इस कदम में उत्तर प्रदेश में कृषि के क्षेत्र में भारी बदलाव होना लाजिमी है। केंद्र ने सहकारी बैंकों के मामले में वैद्यनाथन कमेटी की सिफारिशों की रोशनी में 922 करोड़ रुपये भुगतान की मंजूरी दे दी है। जबकि, अभी 26 लाख टन के अलावा तीन लाख टन अतिरिक्त उर्वरक भी देने का भरोसा दिया है। गांवों में भी पाइप के जरिये पेयजल उपलब्ध कराने के लिए अगले दस साल में (2022 तक) सात हजार करोड़ की दरकार है। केंद्र ने मदद भरोसा दिया है। जबकि आर्सेनिक वाले क्षेत्रों में तीन हजार करोड़ की मांग है। केंद्र ने फिलहाल तीन लाख 86 हजार अतिरिक्त इंदिरा आवास का भरोसा दिया है।
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