पूर्ण बहुमत से यूपी की सत्ता संभालने के जोश में राज्य की विकास दर दस फीसदी पर ले जाने का दावा करने वाली मायावती सरकार चार साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद भी अपना वादा पूरा करने में विफल रही है। सत्ता संभालने के बाद राज्यपाल के अभिभाषण के जरिए सरकार ने राज्य की जनता से जब विकास दर को दस फीसदी करने का वादा किया था। कई अर्थशास्ति्रयों ने तभी इसे दूर की कोड़ी बताया था। हालांकि तब सरकार ने सत्ता की हनक में इसे नजरअंदाज करते हुए कहा था कि हमने जो कहा उसे करके दिखाएंगे, लेकिन चार साल बाद नतीजे मायूस करने वाले हैं। खुद सरकार के आंकड़े बताते हैं कि वित्तीय वर्ष 2007-08 से 2009-10 के दौरान सूबे की औसत आर्थिक विकास दर 10 फीसदी के लक्ष्य के सापेक्ष 6.6 प्रतिशत ही रही। विशेषज्ञों का मानना है कि दस प्रतिशत विकास दर निर्धारित करते समय सरकार ने जल्दबाजी दिखाई थी, क्योंकि यूपी के जो हालात हैं, उसमें दस प्रतिशत विकास दर हासिल करना फिलहाल मुश्किल है। विकास दर का यह लक्ष्य हासिल करने के लिए पहले हालात सुधारने होंगे। लखनऊ विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रमुख प्रोफेसर यशवीर त्यागी कहते हैं कि यह एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य है। ऐसा नहीं है कि यूपी में इसे हासिल नहीं किया जा सकता, लेकिन इसके लिए यहां के हालात बदलने होंगे। खास तौर से अवस्थापना सुविधाओं को बढ़ाना होगा। बिजली को लेकर उप्र में सबसे ज्यादा समस्या है। दूसरे किसी राज्य में निवेश के लिए उद्योगपति सुशासन चाहते हैं। उनकी अपेक्षा होती है कि भ्रष्टाचार कम हो। पारदर्शिता और फाइलों के बढ़ने की रफ्तार तेज हो। शासन के नीति निर्धारकों ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत यह लक्ष्य तय किया था। 11वीं पंचवर्षीय योजना में केंद्र सरकार ने सालाना नौ प्रतिशत की आर्थिक विकास दर का लक्ष्य रखा था। इसलिए राज्य सरकार ने इस अवधि में एक प्रतिशत ज्यादा आर्थिक विकास दर का तानाबाना बुना था, लेकिन 11वीं पंचवर्षीय योजना में देश की आर्थिक विकास दर से हमकदम न हो पाने के कारण राज्य सरकार अपने इस मकसद में कामयाब नहीं हो सकी। वर्ष 2004-05 में उप्र मेंप्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत की 53.2 प्रतिशत थी। वहीं 2007-08 में यह 48.6 प्रतिशत और 2009-10 में 48 फीसदी रह गई। प्राथमिक क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में सालाना 5.7 प्रतिशत का लक्ष्य रखा गया था। द्वितीयक क्षेत्र की वार्षिक वृद्धि दर का लक्ष्य 10.5 प्रतिशत तय किया गया और इसके अंतर्गत आने वाले विनिर्माण क्षेत्र को सालाना 11.5 प्रतिशत की दर से बढ़ाने का संकल्प लिया गया। वहीं तृतीयक क्षेत्र के लिए योजना की अवधि में 12.4 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर निर्धारित की गई। प्राथमिक क्षेत्र की वार्षिक विकास दर महज 2.7 प्रतिशत रही, जबकि इसके अंतर्गत आने वाले कृषि और पशुपालन क्षेत्र में सालाना 2.2 फीसदी की बढ़ोतरी ही हो सकी। द्वितीयक क्षेत्र सालाना 6.1 फीसदी की दर से बढ़ा, जबकि इसके दायरे में आने वाले विनिर्माण क्षेत्र में 5.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। मायावती सरकार के कार्यकाल के पहले वर्ष यानी 2007-08 में सूबे की आर्थिक विकास दर 7.5 प्रतिशत रही, जबकि 2006-07 में यह 8.2 प्रतिशत थी। अगले साल यानी 2008-09 में आर्थिक विकास की रफ्तार सुस्त हुई और यह 6.1 प्रतिशत पर सिमट गई। लक्ष्य हासिल न कर पाने के बावजूद राज्य सरकार इसलिए खुश है कि दसवीं पंचवर्षीय योजना में हासिल की गई 5.2 प्रतिशत की वार्षिक विकास दर को उसने पीछे छोड़ दिया है।
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