अपने नवीनतम सर्वे में राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (एनएसएस) ने देश में अमीरों व गरीबों के मध्य प्रति व्यक्ति आय में बढ़ती खाई का पता लगाया है। 2009-10 में ग्रामीण क्षेत्र में प्रति व्यक्ति औसत मासिक आय 1,053.64 रुपये तथा शहरी क्षेत्र में 1,984.46 रुपये थी। एनएसएस को यह भी मालूम चला है कि देश के ग्रामीण अपनी कुल आय का 57 फीसदी तथा शहरी 44 फीसदी हिस्सा भोजन पर खर्च करते हैं। एमएमआरपी पर आधारित नवीनतम रिपोर्ट जारी करते हुए एनएसएस ने यह भी संकेत दिया है कि शहरी जनसंख्या का प्रति व्यक्ति व्यय स्तर ग्रामीणों से लगभग 88 फीसदी अधिक है। एमएमआरपी संदर्भित अनुमान के अनुसार 2009-10 में ग्रामीण भारत में प्रति व्यक्ति मासिक व्यय 1,053.64 रुपये तथा शहरी भारत में 1,984.46 रुपये था। सर्वे के मुताबिक कुल ग्रामीण जनसंख्या में 10 प्रतिशत अत्यधिक निर्धनों का प्रति व्यक्ति औसत मासिक व्यय 453 रुपये जबकि शहरों में 10 प्रतिशत निर्धनों का प्रति व्यक्ति औसत मासिक व्यय 599 रुपये है। देश की जनसंख्या में ऊपरी और निचले तबके की आय के मध्य एक बड़ी खाई उभरकर सामने आई है। चोटी के 10 प्रतिशत ग्रामीण जनसंख्या का प्रति व्यक्ति औसत मासिक व्यय 2,517 रुपये जो कि निचले तबके के ग्रामीण निर्धनतमों से 5.6 गुना अधिक है। जबकि चोटी के 10 प्रतिशत शहरी जनसंख्या का प्रति व्यक्ति औसत मासिक व्यय 5,863 रुपये या शहरी जनसंख्या के निर्धनतमों से 9.8 गुना अधिक है। सर्वे में यह भी संकेत है कि ग्रामीण भारत में आधी जनसंख्या जो घरेलू कार्यो में लगी है का प्रति व्यक्ति औसत मासिक व्यय 895 रुपये है और ग्रामीण जनसंख्या में लगभग 40 प्रतिशत का प्रति व्यक्ति औसत मासिक व्यय 800 रुपये से भी कम है। ग्रामीण जनसंख्या में करीब 60 प्रतिशत लोगों का प्रति व्यक्ति औसत मासिक व्यय 1,000 रुपये से भी कम है जबकि मात्र 10 प्रतिशत ऐसे हैं जिनका प्रति व्यक्ति औसत मासिक व्यय 1,650 रुपये से अधिक है। इसी प्रकार, देश की शहरी जनसंख्या में आधी आबादी ऐसी है जिसका प्रति व्यक्ति औसत मासिक व्यय 1,500 रुपये से भी कम है। देश की कुल ग्रामीण जनसंख्या में लगभग 70 प्रतिशत ऐसे हैं जिनका प्रति व्यक्ति औसत मासिक व्यय 1,100 रुपये से अधिक है जबकि 30 और 20 प्रतिशत ऐसे हैं जिनका प्रति व्यक्ति औसत मासिक व्यय क्रमश: 2,100 रुपये और 2,600 रुपये से अधिक है। खाद्य खर्च को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण ने अपनी ताजा रिपोर्ट में समाज के बड़े और छोटे वर्गो में भी विभेद किया है। ग्रामीण भारत में, निचले तबके की लगभग 10 प्रतिशत जनसंख्या अपनी आय का 65 फीसदी खर्च करती है जबकि ऊपरी तबके की 10 प्रतिशत जनसंख्या 46 फीसदी खर्च करती है। वैसे ही, शहरी जनसंख्या का 10 प्रतिशत कमजोर वर्ग अपनी आय का 62 फीसदी तथा 10 प्रतिशत सशक्त वर्ग अपने बजट का 31 फीसदी खाद्य पर खर्च करता है। एनएसएस के अध्ययन में संशोधित एमएमआरपी के अतिरिक्त दो अन्य मापकों, यूआरपी और एमआरपी का भी उपयोग किया गया है। सर्वे का समग्र परिणाम एमएमआरपी विधि पर आधारित है जो पहली बार इस प्रकार के मापन में अपनाया गया है। यूआरपी और एमआरपी विधि का प्रयोग एनएसएस के सर्वे में पहले किया जा चुका है। यूआरपी के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्र में खाद्य पर प्रति व्यक्ति मासिक व्यय 927.70 रुपये और शहरी क्षेत्र में 1,785.81 रुपये थी। जबकि, एनएसएस के 2004-05 में कराए गए सर्वे में यह आंकड़ा ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में क्रमश: 558.78 और 1,052.36 था। 2009- 10 में देश में प्रति व्यक्ति मासिक व्यय ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में क्रमश: 953.05 और 1,856.01 रुपये था। 2004-05 में यह क्रमश: 579.17 और 1,104.60 रूपये था। जुलाई 2009 और 2010 में देश में कराए गए इस महत्वपूर्ण सर्वेक्षण में ग्रामीण क्षेत्र के 7,524 गांवों और शहरी क्षेत्र के 5,284 ब्लाकों को शामिल किया गया था। घरेलू उपभोग तीन संदर्भित दिनों से संबंधित है। जैसे, चालू सप्ताह, चालू महीना और चालू वर्ष|
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