जमीन अधिग्रहण के विरोध में चल रही किसानों की लड़ाई का असर अकेले नोएडा एक्सटेंशन पर नहीं पड़ा है। इस लड़ाई ने शहर की छह ऐसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का मार्ग भी अवरुद्ध कर दिया है, जो शहर के विकास में मील का पत्थर साबित हो सकती थीं। योजनाओं के पूरे न होने से लोगों को मुसीबत झेलनी पड़ ही रही है। प्राधिकरण ने योजनाओं में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए प्रयास किए, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी है। किसान का कहना है कि मांग पूरी होने के बाद ही योजनाओं को आगे बढ़ने दिया जाएगा। 10 वर्षो से अटका है दादरी रेलवे ओवरब्रिज : ग्रेटर नोएडा व दादरी को जोड़ने के लिए प्राधिकरण ने वर्ष 1999 में रेलवे ओवरब्रिज के ऊपर पुल निर्माण की योजना बनाई गई थी। वर्ष 2001 में निर्माण शुरू कर दिया गया। पुल का निर्माण तिलपता से रूपवास व कैलाशपुर होते हुए धूम मानिकपुर गांव तक होना था। एक वर्ष निर्माण चलने के बाद उसे बंद कर दिया गया। 2005 में दादरी क्षेत्र के गांवों को ग्रेटर नोएडा फेस-दो में शामिल किया गया। इससे पुल की आवश्यकता और बढ़ गई। प्राधिकरण ने 2007 में फिर से निर्माण की योजना तैयार की। निर्माण की जिम्मेदारी रेलवे की संस्था राइट्स को दी गई। तीन वर्ष के अंदर निर्माण पूरा करना था, लेकिन दादरी की तरफ डेढ़ किलोमीटर क्षेत्र में किसानों ने प्राधिकरण को जमीन पर कब्जा नहीं लेने दिया। किसानों का कहना है कि उनकी जमीन को 1999 में अधिग्रहीत किया गया था। उस समय उन्हें 160 रुपये प्रति वर्ग गज का मुआवजा देने का प्रस्ताव दिया गया था। कम राशि होने की वजह से अब तक उन्होंने मुआवजा नहीं उठाया है। उन्हें मौजूदा दर पर मुआवजा चाहिए। प्राधिकरण इस विवाद को सुलझाने में नाकाम रहा। रेलवे ट्रैक पर पुल न बनने की वजह से क्रासिंग पर वाहनों की लंबी कतार लगी रहती है। 130 मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण अधर में: ग्रेटर नोएडा को नोएडा से जोड़ने के लिए वर्ष 2003 में 130 मीटर चौड़ी व 25 किलीमीटर लंबी सड़क बनाने की योजना बनी थी। वर्ष 2007 तक इसे पूरा किया जाना था। तिलपता, देवला व खोदना खुर्द गांव में किसानों ने कई स्थानों पर सड़क के लिए जमीन नहीं दी है। इससे सड़क का निर्माण अटका पड़ा है। 60 मीटर चौड़ी सड़क का काम भी रुका : ग्रेटर नोएडा को गाजियाबाद से जोड़ने के लिए 2003 में सूरजपुर पुलिस लाइन से विजयनगर बाइपास से एनएच-24 तक 22 किलोमीटर लंबी सड़क बनाने की योजना तैयार की गई। बीस किलोमीटर सड़क का निर्माण हो चुका है। विजयनगर के पास दो किलोमीटर क्षेत्र में किसानों की आबादी पड़ गई। किसानों के साथ प्राधिकरण का समझौता भी हो चुका है। आबादी को ग्रेटर नोएडा में स्थानांतरित किया जाना है। प्राधिकरण ने पांच एकड़ जमीन आवंटित कर दी है और पांच एकड़ जमीन और दी जानी है। समय पर जमीन न मिलने केचलते किसानों ने सड़क का निर्माण बंद करा रखा है। पेरिफैरल हाईवे का निर्माण भी नहीं हुआ शुरू : राष्ट्रीय राजधानी के चारों तरफ बनने वाला पेरिफैरल हाईवे गौतमबुद्धनगर के 16 गांवों की सीमा से गुजरेगा। अप्रैल 2010 में इसका निर्माण शुरू होना था। बील अकबरपुर व सिरसा गांव में सड़क के रेखांकन में आबादी पड़ जाने की वजह से किसानों ने निर्माण शुरू नहीं होने दिया। किसानों के साथ बनाई जाएगी सहमति : सीईओ रमा रमन ने कहा कि किसानों के साथ चल रहे विवाद को सहमति बनाकर दूर किया जाएगा। 130 मीटर चौड़ी सड़क के निर्माण में अब कोई बाधा नहीं है। सिर्फ रेलवे ओवर ब्रिज के किसानों के साथ सहमति के प्रयास चल रहे हैं।
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