हरियाणा के लोग इस समय पीने के पानी का जबरदस्त संकट झेल रहे हैं। प्रदेश के दक्षिणी भाग में पेयजल उपलब्धता की स्थिति बेहद विकट है। विशेष रूप से राजस्थान के साथ लगते भिवानी, महेंद्रगढ़ और मेवात इलाकों में पीने का साफ पानी उपलब्ध नहीं है। प्रदेश के विभिन्न भागों में पेयजल की उपलब्धता के भारी अंतर को यदि नजरअंदाज कर भी दिया जाए तो 950 बस्तियां और गांव ऐसे हैं, जहां पानी की जबर्दस्त कमी है। इन गांवों में पीने के पानी की किल्लत को दूर करने के लिए 504 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। प्रदेश के उत्तरी भाग में पेयजल के पर्याप्त साधन हैं। दक्षिण में पानी न सिर्फ खारा है, बल्कि 60 प्रतिशत भू-जल अधिक गहरा और पीने लायक नहीं है। केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार ग्रामीण इलाकों में 40 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन और शहरी क्षेत्र में 135 लीटर पानी प्रति व्यक्ति प्रतिदिन उपलब्ध होना जरूरी है। प्रदेश में इस मानक के हिसाब से जलापूर्ति नहीं हो रही है। ग्रामीण इलाकों में कहीं 20 लीटर तो कहीं 60 लीटर पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। शहरी इलाकों में कहीं 100 लीटर तो कहीं 145 लीटर भी जलापूर्ति है। सबसे अधिक परेशानी राजस्थान से सटे रेतीले व बंजर इलाके में हो रही है। लिहाजा नारनौल ब्रांच नहर से पेयजल आपूर्ति के लिए 127.4 करोड़ रुपये की योजना तैयार की गई है। इस योजना पर काम जून के पहले सप्ताह में आरंभ होगा। पिछले साल इन गांवों में पेयजल आपूर्ति के लिए केंद्र ने 214 करोड़ रुपये दिए थे। इस बार 239 करोड़ रुपये हासिल हुए हैं। राज्य के संसाधनों से 265 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है। प्रदेश की जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी मंत्री किरण चौधरी ने राज्य में पेयजल की किल्लत का मुद्दा ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश के सामने भी उठाया है। किरण चौधरी का दावा है कि राज्य सरकार प्रभावी जल आपूर्ति प्रणाली पर जोर दे रहीे है।
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