Saturday, April 16, 2011

158 साल की हो गई भारतीय रेल


भारतीय रेल का सफर 22 दिसंबर 1851 से शुरू हुआ जब पहली बार मालगाड़ी लोहे की पटरी पर दौड़ी। लेकिन मूल रूप से शुभारंभ 16 अप्रैल 1853 को माना गया। क्योंकि यही वह दिन था कि जब पहली बार मुंबई से थाने के बीच यात्री रेल चली। 16 अप्रैल को भारतीय रेल के 158 वर्ष पूरे हो जाएंगे। देश की लाइफलाइन भारतीय रेल के मानचित्र में धनबाद रेल मंडल ने कल भी अपनी अमिट छाप छोड़ी थी और लोडिंग डिवीजन के रूप में आज भी धनबाद का नाम शीर्ष पर है। विकास की गाथा : भारतीय रेल के विकास ने देश की आजादी के चार साल बाद यानी 1951 से रफ्तार पकड़ी। सन 1952 से जोनल रेलवे प्रणाली अस्तित्व में आया। 1952 से 2010 तक भारतीय रेल 16 जोनों में बंटा था। इस वर्ष मेट्रो रेल को नया रेल बनाया गया। जिससे अब भारतीय रेल 17 जोन का हो गया। विकास की रफ्तार भले ही 1951 से शुरू हुई। पर धनबाद रेल मंडल का हावड़ा-दिल्ली रेलखण्ड यानी ग्रैंड कॉर्ड आजादी से पहले ही 1906 में ही अस्तित्व में आ गया था। इस वर्ष इस रेलखण्ड ने अपने 105 वर्ष पूरे किये हैं। इतिहास : कुछ अलग हटकर 1832 में भारतीय रेल की कल्पना की गई। पर कल्पना को मूर्त रूप नहीं दिया जा सका। वर्ष 1842 में विश्र्वकवि रवीन्द्र नाथ टैगोर के दादा प्रिंस द्वारका नाथ टैगोर इंग्लैंड दौरे पर गये। इंगलैंड में लोहे की पटरी पर दौड़ती रेलगाड़ी देखकर वे खासे प्रभावित हुए। उन्होंने कोलकाता से राजमहल के बीच रेलवे लाइन बिछाने की योजना बनाई। पर उनकी योजना सफल नहीं हुई। सन 1844 में ब्रिटिश इंडिया में रेलवे के विषय पर खबर छपी। 1845 में कोलकाता-दिल्ली रेलखण्ड का सर्वे पूरा कर लिया गया। 1851 में हावड़ा-राजमहल रेलखण्ड का निर्माण शुरू हुआ। 1852 में बोरीबंदर-थाणे रेल लाइन निर्माण कार्य पूर्ण लिया गया। 18 नवंबर को बोरीबंदर से थाणे के बीच पहली रेलगाड़ी ट्रायल रन हुआ। 16 अप्रैल 1853 को पहली बार रेल पटरी पर 14 डब्बे वाली रेलगाड़ी बोरीबंदर से थाणे के बीच 400 अतिथियों के साथ चली। 9 अगस्त 1854 में हावड़ा से हुगली के बीच 9 डब्बे वाली ट्रेन 300 अतिथियों के साथ रवाना हुई |

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