भारतीय संस्कृति के लिए पहचाने जानेवाले शहरों में विकास एवं रखरखाव बिल्कुल एक जैसा करने के लिए श्हारी विकास मंत्रालय ने एक ऐसी पहल की है जिसके तहत वे शहर चाहे जिस राज्य के हों, मगर वहां पर नागरिक सुख सुविधाओं व यातायात से जुड़े मामलों का विकास बिल्कुल एक जैसा होगा ताकि इन शहरों में धर्म एवं संस्कृति के दर्शन करने के लिए जानेवाले लोगों को कोई परेशानी न हो और उन्हें इन शहरों में भ्रमण के दौरान अनेकता में एकता का अहसास हो। इस तरह के 18 शहरों को चुना गया है और उन्हें क्षेत्रीय या राज्य आधार के बजाए आदर्श विकास एवं रखरखाव की जानकारी देने के लिए अहमदाबाद स्थित पर्यावरणीय योजना एवं तकनीक केंद्र को 'ज्ञान प्रबंधक' बनाया गया है। इन शहरों के स्थानीय निकाय एवं प्रशासन के बीच समन्वय का काम शहरी मामलों के राष्ट्रीय संस्थान को मिला है। दरअसल देश में अलग-अलग धर्म एवं संस्कृति के नाम पर पहचाने जाने वाले इन शहरों में प्राय: एक ही जैसे लोग जाते हैं चाहे वो श्रद्धालु हों या दशर्नार्थी। लोगों को उन शहरों में उतरते ही बिल्कुल अलग-अलग तरह की समस्याओं का सामना हर मोड़ पर करना पड़ता है । उन्हें इन शहरों में अलग तरह की सड़कें और साइन बोर्ड व यातायात के साधन नजर आते हैं। मंत्रालय का मानना है कि यदि इन शहरों का विकास और रखरखाव करनेवाली एजेंसियों को आपस में जोड़ दिया जाए और उन्हें एक सामान तरह की परियोजनाएं बना कर दी जाएं और बताया कि जाए कि हरिद्वार में यह काम अच्छा हो रहा है जिसे अजमेर में भी किया जा सकता है या फिर अमृतसर में एक बढ़िया काम हुआ है यदि वह काम बोधगया में कर दिया जाए तो उस शहर के आने वाले श्रद्धालु को हम पहले से कुछ और अच्छा दिखा सकते हैं। इस तरह के शहरों में वाराणसी, आगरा, इलाहाबाद, मथुरा, हरिद्वार, मदुरई, अमृतसर, उज्जैन, पणजी, नांदेड़, त्रिपुरा, पोरबंदर, पुरी, बोधगया, अजमेर, पुष्कर, मैसूर और पांडिचेरी को शामिल किया गया है। इन शहरों में वहां के राज्य सरकारों व स्थानीय निकायों की एजेंसियों एवं उनके अधिकारियों की सूची तैयार कर ली गई है। किस शहर में किस-किस मद में विकास व रखरखाव के लिए कहां-कहां से कितना बजट आता है उसकी जानकारी भी आपस में दी जाएगी ताकि उस बजट से और बढ़िया काम क्या हो सकता है। यह ज्ञान देने के लिए पर्यावरणीय योजना एवं तकनीक केंद्र अहमदाबाद के विशेषज्ञों को लगाया गया है। यह केंद्र कम बजट में एक जैसा विकास करने की तकनीक खोजेगा। यही नहीं, इन शहरों में जो कुछ भी अच्छा काम हुआ है उसकी जानकारी एक दूसरे को देने के लिए सूची तैयार की जा रही है ताकि तीर्थ यात्रा में जानेवाले लोगों को विकास एवं रखरखाव में अनेकता में एकता नजर आए।
Monday, April 25, 2011
देश के 18 शहरों के पर्यटन पर ध्यान देगा राष्ट्रीय संस्थान
भारतीय संस्कृति के लिए पहचाने जानेवाले शहरों में विकास एवं रखरखाव बिल्कुल एक जैसा करने के लिए श्हारी विकास मंत्रालय ने एक ऐसी पहल की है जिसके तहत वे शहर चाहे जिस राज्य के हों, मगर वहां पर नागरिक सुख सुविधाओं व यातायात से जुड़े मामलों का विकास बिल्कुल एक जैसा होगा ताकि इन शहरों में धर्म एवं संस्कृति के दर्शन करने के लिए जानेवाले लोगों को कोई परेशानी न हो और उन्हें इन शहरों में भ्रमण के दौरान अनेकता में एकता का अहसास हो। इस तरह के 18 शहरों को चुना गया है और उन्हें क्षेत्रीय या राज्य आधार के बजाए आदर्श विकास एवं रखरखाव की जानकारी देने के लिए अहमदाबाद स्थित पर्यावरणीय योजना एवं तकनीक केंद्र को 'ज्ञान प्रबंधक' बनाया गया है। इन शहरों के स्थानीय निकाय एवं प्रशासन के बीच समन्वय का काम शहरी मामलों के राष्ट्रीय संस्थान को मिला है। दरअसल देश में अलग-अलग धर्म एवं संस्कृति के नाम पर पहचाने जाने वाले इन शहरों में प्राय: एक ही जैसे लोग जाते हैं चाहे वो श्रद्धालु हों या दशर्नार्थी। लोगों को उन शहरों में उतरते ही बिल्कुल अलग-अलग तरह की समस्याओं का सामना हर मोड़ पर करना पड़ता है । उन्हें इन शहरों में अलग तरह की सड़कें और साइन बोर्ड व यातायात के साधन नजर आते हैं। मंत्रालय का मानना है कि यदि इन शहरों का विकास और रखरखाव करनेवाली एजेंसियों को आपस में जोड़ दिया जाए और उन्हें एक सामान तरह की परियोजनाएं बना कर दी जाएं और बताया कि जाए कि हरिद्वार में यह काम अच्छा हो रहा है जिसे अजमेर में भी किया जा सकता है या फिर अमृतसर में एक बढ़िया काम हुआ है यदि वह काम बोधगया में कर दिया जाए तो उस शहर के आने वाले श्रद्धालु को हम पहले से कुछ और अच्छा दिखा सकते हैं। इस तरह के शहरों में वाराणसी, आगरा, इलाहाबाद, मथुरा, हरिद्वार, मदुरई, अमृतसर, उज्जैन, पणजी, नांदेड़, त्रिपुरा, पोरबंदर, पुरी, बोधगया, अजमेर, पुष्कर, मैसूर और पांडिचेरी को शामिल किया गया है। इन शहरों में वहां के राज्य सरकारों व स्थानीय निकायों की एजेंसियों एवं उनके अधिकारियों की सूची तैयार कर ली गई है। किस शहर में किस-किस मद में विकास व रखरखाव के लिए कहां-कहां से कितना बजट आता है उसकी जानकारी भी आपस में दी जाएगी ताकि उस बजट से और बढ़िया काम क्या हो सकता है। यह ज्ञान देने के लिए पर्यावरणीय योजना एवं तकनीक केंद्र अहमदाबाद के विशेषज्ञों को लगाया गया है। यह केंद्र कम बजट में एक जैसा विकास करने की तकनीक खोजेगा। यही नहीं, इन शहरों में जो कुछ भी अच्छा काम हुआ है उसकी जानकारी एक दूसरे को देने के लिए सूची तैयार की जा रही है ताकि तीर्थ यात्रा में जानेवाले लोगों को विकास एवं रखरखाव में अनेकता में एकता नजर आए।
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