देश में सरकारी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होने की खबर वास्तव में दिल को सुकून पहुंचाने वाली है। वैश्विक आर्थिक मंदी के दौरान नौकरियां गंवा चुके लोगों में से अब भी काफी लोग ऐसे हैं जिनको नौकरी नहीं मिल सकी है। इस खबर ने उनके लिए संजीवनी का काम किया है और उन्हें उम्मीद जगी है कि उनको भी कोई अच्छी नौकरी मिल जाएगी। भारत में नौकरियों की बहार आने की बात तो पिछले साल दिसम्बर में फोर्ब्स पत्रिका की आउटलुक रिपोर्ट में ही कह दी गई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि 2011 में भारत दुनिया में सबसे ज्यादा नौकरियां देने वाला देश बनकर उभरेगा और उसका 'नेट हायरिंग आउटलुक' चीन को पीछे छोड़ते हुए 42 प्रतिशत तक जा पहुंचेगा जबकि चीन का सिर्फ 40 प्रतिशत तक रह जाएगा। फोर्ब्स की इस रिपोर्ट की बात अब सच होती दिखाई दे रही है और भारत का नेट हायरिंग आउटलुक रिपोर्ट में दिये गए आंकड़े के काफी करीब है। हाल में फिक्की की 'स्किल डेवलपमेंट लैंडस्केप इन इंडिया एंड इंप्लिमेंट ऑफ क्वालिटी स्किल ट्रेनिंग' रिपोर्ट में भी कहा गया कि अगर देश की विकास दर को मौजूदा आठ से साढ़े आठ प्रतिशत के बीच अगले दस साल तक बरकरार रखा जाए तो नौकरियों के लाखों नहीं करोड़ों अवसर सृजित होंगे और हर साल करीब चार करोड़ लोगों को रोजगार मिल सकेगा। फ्रॉस्ट एंड सुलीवन कंपनी की एक रिपोर्ट में भी कहा गया कि आने वाले कुछ वर्षो में भारत में एक नया ट्रेंड चलेगा जिसे 'रिवर्स ब्रेन ड्रेन' कहा जा सकता है। इस ट्रेंड के अनुसार दुनिया भर में उच्च पदों पर काम कर रहे अप्रवासी भारतीय अगले कुछ सालों में भारत आकर अपना कारोबार शुरू करेंगे, नई कंपनियां खोलेंगे जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर निकलेंगे। इसके अलावा हजारों अप्रवासी भारतीय भारत में काम कर रही कंपनियों में उच्च पदों पर नियुक्त किए जाएंगे। प्रतिष्ठित मानव संसाधन फर्म मा फोई रैंड स्टैंड ने भी भारत में नौकरियों की संभावनाओं का बेहतरीन खाका खींचा है। मा फोई की रिपोर्ट के अनुसार चालू वर्ष में दिसम्बर तक करीब 16 लाख लोगों को रोजगार मिल जाएगा। ये रोजगार हास्पिटिलिटी, आईटी, एनर्जी, रीयल एस्टेट, हेल्थकेयर, रिटेल और मीडिया एंड इंटरटेनमेंट के सेक्टर में उपलब्ध होंगे। ये आंकड़े सरकार और युवाओं को निश्चित रूप से सुकून पहुंचाने वाले हैं लेकिन कई सवाल ऐसे भी हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सुलीवन की रिपोर्ट के अनुसार अगले 20 वर्षो में देश में शहरीकरण की प्रक्रिया में तेजी आएगी और कम से कम 15 छोटे शहर महानगरों में तब्दील हो जाएंगे, 15 नए शहरों का विकास होगा, जनसंख्या में इजाफा होगा और कृषि का रकबा घटेगा जिससे कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों को नौकरियों में जाना पड़ेगा। ये सारे कारक आठ से दस प्रतिशत के बीच झूल रही बेरोजगारी की दर को और बढ़ा सकते हैं। इसलिए सरकार को विकास दर और बेरोजगारी की दर में संतुलन बनाए रखने पर खास ध्यान देना होगा। शहरीकरण के चलते लोगों के रोजगार न छिन जाएं, इसका ध्यान रखना होगा। अगर इन बातों का ध्यान न रखा गया तो कृषि क्षेत्र से जुड़े युवाओं के रूप में बेरोजगारों की एक नई श्रेणी सामने आ सकती है।
Wednesday, April 20, 2011
रोजगार की बहार
देश में सरकारी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होने की खबर वास्तव में दिल को सुकून पहुंचाने वाली है। वैश्विक आर्थिक मंदी के दौरान नौकरियां गंवा चुके लोगों में से अब भी काफी लोग ऐसे हैं जिनको नौकरी नहीं मिल सकी है। इस खबर ने उनके लिए संजीवनी का काम किया है और उन्हें उम्मीद जगी है कि उनको भी कोई अच्छी नौकरी मिल जाएगी। भारत में नौकरियों की बहार आने की बात तो पिछले साल दिसम्बर में फोर्ब्स पत्रिका की आउटलुक रिपोर्ट में ही कह दी गई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि 2011 में भारत दुनिया में सबसे ज्यादा नौकरियां देने वाला देश बनकर उभरेगा और उसका 'नेट हायरिंग आउटलुक' चीन को पीछे छोड़ते हुए 42 प्रतिशत तक जा पहुंचेगा जबकि चीन का सिर्फ 40 प्रतिशत तक रह जाएगा। फोर्ब्स की इस रिपोर्ट की बात अब सच होती दिखाई दे रही है और भारत का नेट हायरिंग आउटलुक रिपोर्ट में दिये गए आंकड़े के काफी करीब है। हाल में फिक्की की 'स्किल डेवलपमेंट लैंडस्केप इन इंडिया एंड इंप्लिमेंट ऑफ क्वालिटी स्किल ट्रेनिंग' रिपोर्ट में भी कहा गया कि अगर देश की विकास दर को मौजूदा आठ से साढ़े आठ प्रतिशत के बीच अगले दस साल तक बरकरार रखा जाए तो नौकरियों के लाखों नहीं करोड़ों अवसर सृजित होंगे और हर साल करीब चार करोड़ लोगों को रोजगार मिल सकेगा। फ्रॉस्ट एंड सुलीवन कंपनी की एक रिपोर्ट में भी कहा गया कि आने वाले कुछ वर्षो में भारत में एक नया ट्रेंड चलेगा जिसे 'रिवर्स ब्रेन ड्रेन' कहा जा सकता है। इस ट्रेंड के अनुसार दुनिया भर में उच्च पदों पर काम कर रहे अप्रवासी भारतीय अगले कुछ सालों में भारत आकर अपना कारोबार शुरू करेंगे, नई कंपनियां खोलेंगे जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर निकलेंगे। इसके अलावा हजारों अप्रवासी भारतीय भारत में काम कर रही कंपनियों में उच्च पदों पर नियुक्त किए जाएंगे। प्रतिष्ठित मानव संसाधन फर्म मा फोई रैंड स्टैंड ने भी भारत में नौकरियों की संभावनाओं का बेहतरीन खाका खींचा है। मा फोई की रिपोर्ट के अनुसार चालू वर्ष में दिसम्बर तक करीब 16 लाख लोगों को रोजगार मिल जाएगा। ये रोजगार हास्पिटिलिटी, आईटी, एनर्जी, रीयल एस्टेट, हेल्थकेयर, रिटेल और मीडिया एंड इंटरटेनमेंट के सेक्टर में उपलब्ध होंगे। ये आंकड़े सरकार और युवाओं को निश्चित रूप से सुकून पहुंचाने वाले हैं लेकिन कई सवाल ऐसे भी हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सुलीवन की रिपोर्ट के अनुसार अगले 20 वर्षो में देश में शहरीकरण की प्रक्रिया में तेजी आएगी और कम से कम 15 छोटे शहर महानगरों में तब्दील हो जाएंगे, 15 नए शहरों का विकास होगा, जनसंख्या में इजाफा होगा और कृषि का रकबा घटेगा जिससे कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों को नौकरियों में जाना पड़ेगा। ये सारे कारक आठ से दस प्रतिशत के बीच झूल रही बेरोजगारी की दर को और बढ़ा सकते हैं। इसलिए सरकार को विकास दर और बेरोजगारी की दर में संतुलन बनाए रखने पर खास ध्यान देना होगा। शहरीकरण के चलते लोगों के रोजगार न छिन जाएं, इसका ध्यान रखना होगा। अगर इन बातों का ध्यान न रखा गया तो कृषि क्षेत्र से जुड़े युवाओं के रूप में बेरोजगारों की एक नई श्रेणी सामने आ सकती है।
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