Saturday, June 4, 2011

ढाई सौ शहर बनेंगे स्लम मुक्त


केंद्र सरकार ने शहरों को स्लम मुक्त करने का अभियान छेड़ दिया है। राजीव गांधी आवास योजना के नाम से इस योजना का पहला चरण देश के 250 शहरों में लागू होगा। स्कीम एक लाख से ज्यादा आबादी वाले हर शहर में लागू की जाएगी और इससे लाभान्वित परिवारों को आवास का मालिकाना हक भी दिया जाएगा। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने गुरुवार को इस बारे में एक प्रस्ताव को हरी झंडी दिखा दी। साथ ही शहरों में रहने वाले गरीबों को आसानी से घर बनाने के लिए कर्ज मिल सके इसके लिए एक हजार करोड़ रुपये का कोष भी बनाया गया है। फैसले के बारे में गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने बताया कि सरकार 12 पंचवर्षीय योजना के अंत तक देश को स्लम मुक्त करने का विचार रखती है। योजना को इस वर्ष ही लागू किया जा रहा है। इसको लागू करने में राज्यों की भूमिका अहम होगी। हर राज्य अपनी-अपनी योजना लेकर केंद्र के पास आएंगे और केंद्र के साथ राशि उपयोग करने के बारे में समझौता करेंगे। इसके बाद ही उन्हें राशि दी जाएगी। कम लागत के आवासीय इकाइयों के निर्माण में भी राज्यों की भूमिका अहम होगी। जिन्हें आवास मिलेगा उनसे भी कुछ राशि ली जाएगी लेकिन इस बारे में बाद में फैसला होगा। योजना दो तरह से काम करेगी। या तो मौजूदा स्लम को ही विकसित किया जाएगा या फिर स्लम को किसी बाहरी जगह ले जाया जाएगा। दोनों परिस्थितियों में योजना राज्य सरकार की होगी। योजना से स्लम में रहने वाले लगभग 3.2 करोड़ लोगों को बेहतर जीवनशैली दी जाएगी। चिदंबरम ने बताया कि हालांकि अंतिम फैसला होना बाकी है पर सरकार आवासीय लागत का आधा हिस्सा उठा सकती है। शेष हिस्सा लोगों को आसान शर्तो पर बतौर कर्ज उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी। इस योजना के अंतर्गत शहरी गरीबों को आसानी से गृह ऋण दिलाने की भी व्यवस्था होगी। इसके लिए एक हजार करोड़ रुपये से एक जोखिम गारंटी फंड बनाया गया है।

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