सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नोएडा एक्सटेंशन में लक्जरी फ्लैट बनाने के लिए आपात उपबंध लगाकर किसानों की खेतिहर जमीन अधिग्रहीत किए जाने पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने भू-मालिकों का आपत्ति उठाने का अधिकार खत्म करने पर तीखी टिप्पणियां करते हुए कहा कि राज्यों में और नंदीग्राम नहीं बनने देंगे। कोर्ट ने पुराने भू-अधिग्रहण कानून में बदलाव पर भी जोर दिया। न्यायमूर्ति पी. सथाशिवम व एके पटनायक की पीठ ने ये टिप्पणियां सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली उत्तर प्रदेश सरकार, ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण तथा बिल्डरों की याचिका पर सुनवाई के दौरान कीं। हाईकोर्ट ने 12 मई को नोएडा एक्सटेंशन में साहबरी गांव का 156.3 एकड़ भूमि का अधिग्रहण निरस्त कर दिया था, जिससे फ्लैटों के कई प्रोजेक्ट फंस गए हैं। पीठ ने मामले की सुनवाई 5 जुलाई तक टालते हुए कहा कि वे मामले पर विस्तृत विचार करेंगे। ये फ्लैट किसके इस्तेमाल में आएंगे। कौन इन्हें बना रहा है। इनकी कीमत क्या है। इस सबकी तह तक जाएंगे। कोर्ट ने कहा कि आपात उपबंध अपने आप नहीं लागू हो जाता। वे आंखें नहीं मूंदे रह सकते। एक से जमीन (कृषि भूमि) लेकर दूसरे को दी जा रही है। ये रुकना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता तो कोर्ट इस बाबत कदम उठाएगा। पीठ ने कहा कि विकास सिर्फ कुछ लोगों तक नहीं रह सकता। खेतिहर जमीन के अधिग्रहण पर सवाल उठाते हुए कोर्ट ने पूछा कि क्या सरकार के पास और कोई बंजर जमीन नहीं थी। कोर्ट की टिप्पणीं पर जब ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के वकील अल्ताफ अहमद ने कहा कि यह मामला नंदीग्राम जैसा नहीं है। तो पीठ का सवाल था कि क्या आप अगले नंदीग्राम का इंतजार कर रहे हैं। कोर्ट ने प्राधिकरण से पूछा कि किसानों और भू-मालिकों के पुनर्वास की क्या योजना है। क्या उन्हें मुआवजे के तौर पर अपार्टमेंट में फ्लैट दिए जाएंगे। कोर्ट ने सरकार और प्राधिकरण की पैरोकारी कर रहे वकीलों से कहा कि वे सारी जानकारी और सूचना एकत्र कर कोर्ट के सामने पेश करें|
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