यमुना एक्शन प्लान के तीसरे चरण के लिए 1656 करोड़ रुपये की एक योजना को गुरुवार को केंद्र ने हरी झंडी दिखा दी है। इस प्रस्ताव के तहत ओखला, कोंडली और रिठाला स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को नए सिरे से बनाया जाएगा। परियोजना के लिए जापान इंटरनेशनल कोआपरेशन एजेंसी से वित्तीय मदद ली जाएगी। इसके साथ ही सीसीईए ने निर्यातकों को 800 करोड़ रुपये की ब्याज सब्सिडी देने के एक प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। सरकार की योजना ओखला में एक नया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की है। इससे यमुना की गदंगी दूर करने में काफी मदद मिलेगी क्योंकि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से साफ-सफाई के बाद पानी को यमुना में छोड़ा जाएगा। ओखला की नई वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता 13.6 करोड़ लीटर प्रति दिन की होगी। पूरी परियोजना को शहरी विकास मंत्रालय की देख रेख में दिल्ली जय बोर्ड लागू करेगा। मालूम हो कि भारत सरकार जापान की मदद से वर्ष 1993 से ही यमुना एक्शन प्लान लागू कर रही है। इसके तहत दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के 21 शहरों में 38 सीवेज प्लांट बनाए जा चुके हैं। सरकार का कहना है कि इससे यमुना में प्रदूषण को रोकने में काफी मदद मिलेगी। निर्यातकों को वित्तीय मदद देने के उद्देश्य से चलाई जा रही ब्याज सब्सिडी देने की मौजूदा योजना को मार्च, 2012 तक लागू रखने का फैसला किया है। निर्यातकों को कुल 800 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद मिलेगी। यह राशि सरकार उन बैंकों को देगी जो निर्यातकों को कर्ज देते हैं।
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