Friday, December 2, 2011

चिकित्सा क्षेत्र में विदेशी निवेश की वकालत


खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की मंजूरी को लेकर संसद से सड़क तक जारी घमासान के बीच योजना आयोग उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने स्वास्थ्य (मेडिकल) शिक्षा के क्षेत्र में विदेशी निवेश की जोरदार वकालत की है। मोंटेक का कहना है कि ऐसा किया जाना चाहिए ताकि डॉक्टर व नर्सिग से जुड़े कर्मियों समेत इस क्षेत्र के लिए पेशेवरों की संख्या बढ़ाई जा सके। मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने गुरुवार को सीआइआइ द्वारा आयोजित स्वास्थ्य सम्मेलन के मौके पर पत्रकारों से बातचीत में कहा, मेरा विचार है कि निजी निवेश के लिए दरवाजे खोलना ही बहुत अहम है, और जहां भी निजी को निवेश की अनुमति है वहां मुझे विदेशी निवेश को अनुमति देने में कोई हर्ज नहीं लगता। उन्होंने कहा, यदि निजी क्षेत्र अगले कुछ साल में 10 हजार बिस्तरों की व्यवस्था कर रहे हैं तो आपके पास और 30 मेडिकल कालेज स्थापित करने की जरूरत होगी। अहलूवालिया ने कहा, देश में मेडिकल संस्थानों की मौजूदा क्षमता के साथ अगले कुछ साल में पांच लाख डाक्टर पैदा करना संभव नहीं होगा जो आज की जरूरत है। उन्होंने कहा, फिलहाल बिना ट्रस्ट या सोसाइटी बनाए आप चिकित्सा विश्वविद्यालय नहीं चला सकते। यदि आपके पास एक बड़ा कारपोरेट अस्पताल है और मेडिकल संस्थान चलाना चाहते हैं तो इसकी मंजूरी नहीं है। क्या यह अच्छा है? अहलूवालिया के मुताबिक सिर्फ ट्रस्ट या सोसायटी को ही मेडिकल संस्थान चलाने की अनुमति देने वाला काूनन मौजूद परिप्रेक्ष्य में पुराना हो गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बेहतर होगा कि धारा 25 के तहत चलने वाली कंपनी मेडिकल संस्थान चलाए क्योंकि यह ज्यादा पारदर्शी तरीके से कारोबार चलाएगी। उल्लेखनीय है कि अहलूवालिया की टिप्पणी ऐसे वक्त पर आई है जबकि सरकार की बहु-ब्रांड खुदरा क्षेत्र को विदेशी निवेश के लिए खोलने के फैसले के लिए आलोचना हो रही है। इस फैसले के कारण संसद में गतिरोध पैदा हो गया है और यहां लगातार आठवें दिन कोई काम नहीं हो पाया।

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