Monday, December 19, 2011

आंगनबाड़ी केंद्रों के 2.5 करोड़ लाभार्थियों के बनेंगे विशेष कार्ड


उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाली और पोषाहार न बंटने की लगातार मिल रही शिकायतों से आजिज राज्य सरकार को अब नया प्रयोग सूझा है। अब केंद्रों पर पंजीकृत 249.18 लाख (बच्चे, किशोरी बालिकाएं, गर्भवती तथा धात्री महिलाओं) लोगों का स्पेशल कार्ड बनाया जायेगा और प्रत्येक कार्य दिवस में उनकी रिपोर्ट दर्ज की जायेगी। यह कार्ड राशन कार्ड की तरह होगा, लेकिन इसमें संबंधित बच्चों महिलाओं का पूरा परिचय भी दर्ज रहेगा। इससे आकस्मिक निरीक्षण के दौरान यथास्थिति जांचने में सहूलियत मिलेगी। सूबे में छह वर्ष की आयु के समस्त बच्चों, समस्त गर्भवती तथा धात्री माताओं में कुपोषण को दूर करने के उद्देश्य से अनुपूरक पोषाहार वितरित किया जाता है। लगातार यह शिकायत मिल रही है कि अधिकांश केंद्रों पर पोषाहार का वितरण नहीं हो रहा है और नीचे से ऊपर तक लूट मची है। इधर बड़ी संख्या में मुख्य सेविका, बाल विकास परियोजना अधिकारी और कई जिलों की कार्यक्रम अधिकारी को निलंबित भी किया गया है। प्रमुख सचिव सदाकांत के निर्देश पर पारदर्शिता लाने के लिए अब राशन कार्ड की तरह सभी लाभार्थियों का कार्ड बनेगा। सूबे में छह माह से तीन वर्ष की आयु के 104.41 लाख, तीन वर्ष से छह वर्ष की आयु के 88.31 लाख, गर्भवती और धात्री महिलाएं 45.98 लाख और किशोरी बालिकाएं 10.48 लाख हैं। यानी कुल 249.18 लाख लाभार्थी पंजीकृत है। कार्ड कौन बनायेगा, अभी इस पर निर्णय नहीं हुआ है। पूरे प्रदेश में 897 परियोजना में लगभग ढाई करोड़ लाभार्थियों के लिए इस व्यवस्था के संचालित होने से पहले गाइड लाइन तैयार की जा रही है। इस कार्ड पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लाभार्थी मिले पोषाहार, उपस्थिति, वजन आदि प्रतिदिन दर्ज करेंगी और फिर इस कार्ड पर अभिभावकों का भी हस्ताक्षर होगा। प्रत्येक सप्ताह मुख्य सेविका इसको प्रमाणित करेंगी। औचक निरीक्षक करने वाले अधिकारियों को भी इस कार्ड का निरीक्षण कर अपनी टिप्पणी दर्ज करनी होगी। गौर करने की बात यह भी है कि बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग में लगातार नियम तो बनाये जाते हैं, लेकिन उसका पालन कभी नहीं होता है।

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