Thursday, July 12, 2012

हरियाणा में और महंगी हुई बिजली


जबरदस्त बिजली संकट झेल चुके प्रदेश के लोगों पर अब बिजली के बिलों में फ्यूल चार्ज लगकर आएगा। उपभोक्ताओं पर बिजली की खपत के आधार पर फ्यूल चार्ज में 12 से 24 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई है। हरियाणा विद्युत नियामक आयोग का यह फैसला एक जुलाई से लागू माना जाएगा। इससे पूर्व अप्रैल माह में बिजली के दामों में वृद्धि हुई थी राज्य में फ्यूल सरचार्ज एडजस्टमेंट (एफएसए) बढ़ाने का प्रस्ताव हरियाणा की बिजली वितरण कंपनियों की तरफ से दिया गया है, जिसे राज्य विद्युत नियामक आयोग ने मंजूर कर लिया। फ्यूल चार्ज बढ़ने से अब 40 यूनिट तक बिजली की खपत करने वालों से सरचार्ज के रूप में 12 पैसे प्रति यूनिट अतिरिक्त वसूला जाएगा, जबकि 41 से 50 यूनिट की खपत पर 19 पैसे प्रति यूनिट की वसूली की जाएगी। इसके अलावा 400 यूनिट तक की खपत करने वालों से 23 पैसे प्रति यूनिट और 400 यूनिट से ज्यादा खपत करने पर 24 पैसे प्रति यूनिट सरचार्ज वसूला जाएगा। यह वह वसूली है जो बिजली साल 2010-11 में इस्तेमाल की गई थी। मौजूदा सरचार्ज अगले 24 महीनों तक वसूला जाएगा। बिजली की दरों में फ्यूल सरचार्ज के नाम पर उपभोक्ताओं पर 1087 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ डाला गया है। पहले ही बिजली की दरों में बढ़ोतरी कर इस साल 1795 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ उपभोक्ताओं पर डाला जा चुका है। इतना ही नहीं फ्यूल सरचार्ज के नाम पर उपभोक्ताओं से 15 पैसे प्रति यूनिट से लेकर 36 पैसे प्रति यूनिट तक पहले ही वसूली की जा रही है और मौजूदा बढ़ोतरी इसके अलावा की गई है। इनेलो के प्रधान महासचिव डा. अजय सिंह चौटाला ने बिजली की दरों में फ्यूल सरचार्ज के नाम पर उपभोक्ताओं पर डाले गए 1087 करोड़ रुपये के अतिरिक्त बोझ को प्रदेश की जनता के साथ धोखा बताते हुए इसे तुरंत वापस लिए जाने की मांग की है। भाजपा विधायक दल के नेता अनिल विज ने बिजली की दरों में बढ़ोतरी का विरोध करते हुए कहा कि सरकार द्वारा ताप बिजली घरों के निर्माण में किए गए घोटालों की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए और फ्यूल सरचार्ज के नाम पर लोगों पर डाला गया अतिरिक्त बोझ तुरंत वापस किया जाए अन्यथा पार्टी इसे सहन नहीं करेगी। हरियाणा के बिजली मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव का कहना है कि बिजली उपभोक्ताओं से यूज सरचार्ज वसूली की स्वीकृति हरियाणा विद्युत विनयामक आयोग ने दी है। इसलिए बिजली दरों में वृद्धि का आरोप सरकार पर लगाना ठीक नहीं है। आयोग स्वतंत्र इकाई है।

केंद्र सरकार ने यूपी को दिया 50 हजार करोड़ का तोहफा


राष्ट्रपति चुनाव में केंद्र के साथ ममता बनर्जी की आंखमिचौली ने सपा से उसकी दोस्ती और पक्की कर दी है। शायद यही वजह है कि बारिश के इस खुशगवार मौसम में केंद्र ने भी अखिलेश सरकार पर दिल खोलकर धन की बारिश कर दी है। मायावती सरकार जिस केंद्र से पांच साल तक प्रदेश के लिए 80 हजार करोड़ का विशेष पैकेज मांगती रह गई, उसी केंद्र से अखिलेश सरकार ने महज तीन घंटे में 50 हजार करोड़ से अधिक की मदद के लिए हां करवा ली। बीते पांच साल के इतिहास में मंगलवार को यह पहला मौका था, जब केंद्र और उप्र के लगभग दो दर्जन अफसरों ने प्रधानमंत्री कार्यालय में तीन घंटे तक सिर्फ उत्तर प्रदेश के विकास के लिए खजाना खोलने के रास्तों पर माथापच्ची की। प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव पुलक चटर्जी, उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव जावेद उस्मानी और कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक रंजन की मौजूदगी में हुई इस बैठक में तमाम योजनाओं और कार्यक्रमों में केंद्रीय सहायता के लिए हरी झंडी मिल गई। अखिलेश ने अप्रैल में ही प्रधानमंत्री से मिलकर प्रदेश के विकास के लिए उन्हें 38 पत्र सौंपकर मदद की गुहार की थी। ये मांगें लगभग 93 हजार करोड़ की थीं। सूत्रों की मानें तो उनमें 50 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की मांगों को केंद्र ने हरी झंडी दे दी है। जो बाकी मांगें हैं, उन्हें भी 12वीं पंचवर्षीय योजना में पूरा करने का भरोसा दिया है। बड़े फैसलों में सिंचाई के मद्देनजर केंद्र ने एक झटके में ही 7270 करोड़ रुपये की सरयू नहर परियोजना व 319 करोड़ रुपये की शारदा सहायक क्षमता पुनस्र्थापना परियोजना को राष्ट्रीय योजना घोषित करने की हामी भर दी। अब इस खर्च का 90 प्रतिशत बोझ केंद्र व दस प्रतिशत उत्तर प्रदेश सरकार उठाएगी। केंद्र ने अखिलेश की मांग पर राज्य में नौ नए विश्वविद्यालयों को खोलने के लिए मदद पर रजामंदी दे दी है। अनुसूचित जाति के छात्रों के वजीफे के लिए प्रदेश ने 4500 करोड़ मांगे थे। केंद्र वह भी देगा। साथ ही रायबरेली (लालगंज) में एम्स के लिए जमीन की पड़ताल के लिए जल्द ही केंद्रीय टीम भेजने का भरोसा दिया है। अखिलेश ने 2013 में इलाहाबाद कुंभ मेले के लिए चार सौ करोड़ रुपये मांगे थे। सूत्र बताते हैं कि इस मद में पांच सौ से छह सौ करोड़ रुपये भी मिल सकते हैं। कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक रंजन मानते हैं कि केंद्र के इस कदम में उत्तर प्रदेश में कृषि के क्षेत्र में भारी बदलाव होना लाजिमी है। केंद्र ने सहकारी बैंकों के मामले में वैद्यनाथन कमेटी की सिफारिशों की रोशनी में 922 करोड़ रुपये भुगतान की मंजूरी दे दी है। जबकि, अभी 26 लाख टन के अलावा तीन लाख टन अतिरिक्त उर्वरक भी देने का भरोसा दिया है। गांवों में भी पाइप के जरिये पेयजल उपलब्ध कराने के लिए अगले दस साल में (2022 तक) सात हजार करोड़ की दरकार है। केंद्र ने मदद भरोसा दिया है। जबकि आर्सेनिक वाले क्षेत्रों में तीन हजार करोड़ की मांग है। केंद्र ने फिलहाल तीन लाख 86 हजार अतिरिक्त इंदिरा आवास का भरोसा दिया है।

Saturday, June 30, 2012

अगली कक्षा में मिलेगा लैपटाप-टैबलेट


राज्य मंत्रिमंडल की मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में शुक्रवार को सपा की महत्वाकांक्षी लैपटाप-टैबलेट वितरण योजना के स्वरूप और दिशानिर्देशों समेत वाहनों के लिए प्रस्तावित हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के दामों को मंजूरी प्रदान कर दी। राज्य को बिजली संकट से उबारने के लिए मंत्रिमंडल ने कई अहम् फैसले किए हैं। इनमें उत्पादन निगम को 1320 मेगावाट का नया बिजलीघर लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी देने के साथ पावर कारपोरशन को 8500 करोड़ की गारंटी देना प्रमुख है। सरकार ने पार्टी के चुनावी वादे पर अमल करते हुए यह किया है कि टैबलेट व लैपटॉप उन्हीं छात्र-छात्राओं को दिए जाएंगे जिन्होंने अगली कक्षा में प्रवेश ले लिया है। इसके लिए आवेदन करते समय प्रवेश का प्रमाणपत्र भी लगाना होगा। जिला विद्यालय निरीक्षकों द्वारा लाभार्थियों की सूची तैयार कर जिलाधिकारी के जरिए शासन को भेजी जाएगी। प्रदेश सरकार ने दसवीं पास छात्रों को टैबलेट और बारहवीं पास छात्रों को लैपटाप देने की घोषणा कर रखी है। इसके लिए जरूरी दिशा निर्देश और कार्ययोजना का स्वरूप तय करने के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन भी किया गया है। इस योजना से प्रदेश में पचास लाख से अधिक छात्रों के लाभांवित होने का अनुमान है। मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य को बिजली संकट से उबारने के लिए पांच प्रस्तावों को हरी झंडी दी गई। प्रमुख सचिव ऊर्जा अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि बैठक में राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के अधीन ओबरा सी विस्तार ताप विद्युत परियोजना के तहत 660-660 मेगावाट की दो यूनिटें लगाए जाने का फैसला किया है। 1320 मेगावाट की दोनों यूनिटें लगाने में तकरीबन 8778 करोड़ का खर्च आएगा। इनसे बिजली का उत्पादन शुरू होने में लगभग साढ़े चार वर्ष लगेंगे। उन्होंने बताया कि उत्पादन निगम के पारीछा बिजली घर की पुरानी हो चुकी 110-110 मेगावाट की एक व दो नंबर यूनिट की 285 करोड़ से मरम्मत संबंधी कार्य भी कराए जाएंगे। अभी दोनों यूनिटों में जहां एक बंद है वहीं दूसरे से मात्र 65 मेगावाट बिजली मिल रही है। छह माह में मरम्मत का कार्य पूरा होने के बाद दोनों यूनिटों से लगभग 200 मेगावाट बिजली मिलने लगेगी। प्रमुख सचिव ने बताया कि विद्युत वितरण क्षेत्र के घाटे को पूरा करने के लिए बैंकों से लिए जाने वाले लोन के मद्देनजर मंत्रिमंडल ने पॉवर कारपोरेशन को 8500 करोड़ रुपये की शासकीय गारंटी दिए जाने का भी निर्णय किया है। घाटे के चलते कार्पोरेशन को बिजली खरीदने के लिए बैंकों से लोन नहीं मिल पा रहा है। कारपोरेशन द्वारा पूर्व में खरीदी गई बिजली का भी दो हजार करोड़ से ज्यादा बकाया है। गुप्ता ने बताया कि सौर ऊर्जा क्रय आब्लीगेशन के तय लक्ष्य को पूरा करने के लिए मंत्रिमंडल ने पॉवर ट्रेडिंग कंपनी से 50 मेगावाट सौर ऊर्जा व 200 मेगावाट तापीय बिजली खरीदने का भी फैसला किया है। उन्होंने बताया कि रोजा ताप विद्युत परियोजना स्टेज-दो की पुनरीक्षित लागत के संबंध में कैबिनेट ने तय किया है कि विद्युत नियामक आयोग द्वारा गठित समिति में राज्य सरकार का भी प्रतिनिधि रहे।

Friday, June 22, 2012

पंजाब और राजस्थान भी देंगे बेरोजगारी भत्ता


पंजाब-राजस्थान के बेरोजगारों के लिए अच्छी खबर है। यूपी की तर्ज पर अब इन राज्यों में भी बेरोजगारी भत्ता मिलेगा। पंजाब में स्नातक बेरोजगारों को एक हजार रुपये प्रति माह दिया जाएगा। राजस्थान में डेढ़ साल पहले गहलोत सरकार ने बेरोजगारी भत्ता योजना की घोषणा की थी, जो एक जुलाई से लागू हो जाएगी। इसके तहत पुरुष एवं महिला अभ्यर्थी को पांच सौ रुपये और अतिरिक्त योग्यता वाले अभ्यर्थियों को छह सौ रुपये प्रति माह दिए जाएंगे। पंजाब के वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींडसा ने बुधवार को राज्य का बजट पेश किया। घाटे का बजट होने के बावजूद उन्होंने स्नातक बेरोजगारों को प्रति माह एक हजार रुपये देने की घोषणा की। इसके अतिरिक्त 12वीं कक्षा के लगभग डेढ़ लाख छात्रों को टेबलेट्स देने के लिए 110 करोड़ का धन भी स्वीकृत किया। उन्हीं लोगों को भत्ता दिया जाएगा, जो उच्च शिक्षा में अध्ययनरत हों और तीन साल से रोजगार कार्यालय में रजिस्टर्ड हों। उधर, जयपुर में बुधवार को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक हुई। तय हुआ कि एक जुलाई से पात्र स्नातक बेरोजगारों को भत्ता दिया जाएगा। योजना के तहत परिवार की कुल वार्षिक आय में माता-पिता और पति-पत्नी की आय भी शामिल मानी जाएगी। भत्ता प्राप्त करने की कोई न्यूनतम आयु सीमा नहीं होगी, लेकिन सामान्य अभ्यर्थियों के लिए अधिकतम आयु 30 वर्ष एवं अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला एवं विशेष योग्यजन के लिए यह आयु सीमा 35 वर्ष होगी। प्रार्थी को एक साल पहले से रोजगार कार्यालय में रजिस्टर्ड होना चाहिए। यूपी में पहले ही बेरोजगारों को भत्ता देने की घोषणा की जा चुकी है।
� क�� ! � � �� � �� वजह का एक कारण सियासी भी है। सबे में सरकार बदलते ही आवास नीति बदल जाती है। मसलन, 2003 में सपा सरकार ने आवासीय मांग को पूरा करने के लिए हाईटेक टाउनशिप योजना शुरू की थी, लेकिन 13 को लाइसेंस देने के बाद बसपा सरकार ने उसे समाप्त कर दिया। इसी तरह बसपा सरकार ने शहरी गरीबों को आवास मुहैया कराने वाली कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना लागू की, जिसे मौजूदा सरकार ने समाप्त कर दिया। इंटीग्रेटेड टाउनशिप नीति में भी 31 लाइसेंस देने के बाद अब उसे बदलने की तैयारी है। नगरीय क्षेत्र के बाहर सेटेलाइट टाउन (उपनगरों) को विकसित कर घर की मांग को पूरा करने के लिए बसपा सरकार ने बनाई न्यू-टाउनशिप नीति का भी पुनरीक्षण हो रहा है। दूसरे बसपा सरकार का जोर कमजोर वर्ग को आवास मुहैया कराने पर केंद्रित था। नतीजतन, प्राधिकरण-परिषद गरीबों के ही ज्यादातर घर बनाते रहे। मध्यम व उच्च वर्ग के लिए मांग के मुताबिक भवन-भूखंड नहीं विकसित किए गए। निजी क्षेत्र में भी उतने घर नहीं बने जितने की उम्मीद थी। नतीजा यह रहा कि 11वीं पंचवर्षीय योजना में 15.84 लाख आवास बनाए जाने का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। करीब 10 लाख आवासीय इकाईयों के ही जुटने से 5.46 लाख घरों की कमी बनी रही, जबकि 12वीं पंचवर्षीय (2012- 17) योजना के अंत तक 15.74 लाख आशियाने की मांग और बढ़ने का अनुमान लगाया गया है। ऐसे में अगले पांच वर्ष के दौरान शहरी क्षेत्र में 21.20 लाख घरों की जरूरत का अनुमान है। आवासीय क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि सरकार की जिस तरह की नीतियां हैं उससे उक्त मांग के पूरा होने की कतई उम्मीद नहीं है, क्योंकि जमीन का अधिग्रहण करना दिन-प्रतिदिन कठिन ही होता जा रहा है। जब तक प्राधिकरण-परिषद जरुरत के मुताबिक आवास नहीं मुहैया कराएंगे और निजी क्षेत्र के भवन-भूखंडों के दाम नहीं गिरेंगे तब तक शहरों के आसपास अवैध कालोनियां विकसित होती रहेंगी। बुनियादी सुविधाएं न होने के बावजूद सस्ते के लालच में बड़ी संख्या में लोग ऐसी कालोनियों में बसते जा रहे हैं। स्थिति यह है कि बड़े शहरों में ऐसी 2441 कालोनियां बन चुकी है। गरीबी के चलते शहरों में मलिन बस्तियां भी बनती जा रही है जिसमें झुग्गी-झोपड़ी बनाकर तकरीबन 30 फीसदी आबादी रह रही है।

बिना जमीन कैसे पूरा होगा अपने घर का सपना


शहरी क्षेत्र में मूलभूत सुविधा सहित एक अदद आशियाने के लिए आपको लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। जिन विकास प्राधिकरणों व आवास विकास परिषद के जिम्मे वाजिब दाम पर भवन-भूखंड मुहैया कराना है वे मांग के मुताबिक न जमीन जुटा पा रहे हैं और न ही आवासीय कालोनियां विकसित कर रहे हैं। आवासीय मांग को देखते हुए निजी क्षेत्र बड़े शहरों में भवन-भूखंड, फ्लैट आदि बना तो जा रहे हैं, लेकिन वे इतने महंगे हैं कि मध्यम आय वर्ग की पहुंच से बाहर हैं। बेहतर नागरिक सुविधाओं व रोजगार की तलाश में जिस तरह से बड़ी संख्या में लोग गांवों से शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं उससे शहरों में तेजी से आवासीय मांग बढ़ रही है। इसे पूरा करने के लिए सरकार कागजों पर साल दर साल विकास प्राधिकरण, आवास विकास परिषद एवं निजी क्षेत्र की कंपनिया भवन-भूखंड विकसित करने का लक्ष्य तो बनाती हैं, लेकिन वे पूरे नहीं हो रहे। इसकी मुख्य वजह जमीन नहीं मिल पाना है। मसलन, पिछले वित्तीय वर्ष में इनको 4090 हेक्टेयर भूमि जुटानी थी, लेकिन इसकी दस फीसदी भूमि भी मुहैया नहीं हुई। परिषद को 900 हेक्टेयर भूमि का कब्जा लेना था, लेकिन वित्तीय वर्ष में मात्र 84.34 हेक्टेयर भूमि का ही कब्जा मिल सका। राजधानी लखनऊ में भवन-भूखंडों की बेहद मांग होने के बावजूद प्राधिकरण लक्ष्य के मुताबिक 500 हेक्टेयर भूमि नहीं जुटा सका। पहले से जो लैंड बैंक प्राधिकरण-परिषद के पास था वह भी खाली हो गया है। जो भूमि बची है उसमें से भी करीब ढाई हजार हेक्टेयर कोर्ट के स्टे व अवैध कब्जे में फंसी हुई है। आवास की बढ़ती वजह का एक कारण सियासी भी है। सबे में सरकार बदलते ही आवास नीति बदल जाती है। मसलन, 2003 में सपा सरकार ने आवासीय मांग को पूरा करने के लिए हाईटेक टाउनशिप योजना शुरू की थी, लेकिन 13 को लाइसेंस देने के बाद बसपा सरकार ने उसे समाप्त कर दिया। इसी तरह बसपा सरकार ने शहरी गरीबों को आवास मुहैया कराने वाली कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना लागू की, जिसे मौजूदा सरकार ने समाप्त कर दिया। इंटीग्रेटेड टाउनशिप नीति में भी 31 लाइसेंस देने के बाद अब उसे बदलने की तैयारी है। नगरीय क्षेत्र के बाहर सेटेलाइट टाउन (उपनगरों) को विकसित कर घर की मांग को पूरा करने के लिए बसपा सरकार ने बनाई न्यू-टाउनशिप नीति का भी पुनरीक्षण हो रहा है। दूसरे बसपा सरकार का जोर कमजोर वर्ग को आवास मुहैया कराने पर केंद्रित था। नतीजतन, प्राधिकरण-परिषद गरीबों के ही ज्यादातर घर बनाते रहे। मध्यम व उच्च वर्ग के लिए मांग के मुताबिक भवन-भूखंड नहीं विकसित किए गए। निजी क्षेत्र में भी उतने घर नहीं बने जितने की उम्मीद थी। नतीजा यह रहा कि 11वीं पंचवर्षीय योजना में 15.84 लाख आवास बनाए जाने का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। करीब 10 लाख आवासीय इकाईयों के ही जुटने से 5.46 लाख घरों की कमी बनी रही, जबकि 12वीं पंचवर्षीय (2012- 17) योजना के अंत तक 15.74 लाख आशियाने की मांग और बढ़ने का अनुमान लगाया गया है। ऐसे में अगले पांच वर्ष के दौरान शहरी क्षेत्र में 21.20 लाख घरों की जरूरत का अनुमान है। आवासीय क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि सरकार की जिस तरह की नीतियां हैं उससे उक्त मांग के पूरा होने की कतई उम्मीद नहीं है, क्योंकि जमीन का अधिग्रहण करना दिन-प्रतिदिन कठिन ही होता जा रहा है। जब तक प्राधिकरण-परिषद जरुरत के मुताबिक आवास नहीं मुहैया कराएंगे और निजी क्षेत्र के भवन-भूखंडों के दाम नहीं गिरेंगे तब तक शहरों के आसपास अवैध कालोनियां विकसित होती रहेंगी। बुनियादी सुविधाएं न होने के बावजूद सस्ते के लालच में बड़ी संख्या में लोग ऐसी कालोनियों में बसते जा रहे हैं। स्थिति यह है कि बड़े शहरों में ऐसी 2441 कालोनियां बन चुकी है। गरीबी के चलते शहरों में मलिन बस्तियां भी बनती जा रही है जिसमें झुग्गी-झोपड़ी बनाकर तकरीबन 30 फीसदी आबादी रह रही है।

Friday, June 1, 2012

हंगामे की बीच पेश हुआ करमुक्त बजट


विधानसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच वित्त मंत्री डॉ. इंदिरा हृदयेश ने वर्ष 2012-13 का वार्षिक बजट पेश किया। बजट में आम आदमी को राहत देते हुए सरकार ने कोई नया कर नहीं लगाया। छोटे कारोबारियों, किसानों, अल्पसंख्यकों पर मेहर बरसाई गई है। कुल 21931.77 करोड़ के बजट प्रस्ताव में प्लान में 7048.96 करोड़ और नान प्लान में 14882.81 करोड़ का प्रावधान है। नई सरकार ने लोक-लुभावन बजट में पांच बिंदुओं आजीविका सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, वन एवं पर्यावरण सुरक्षा के साथ आंतरिक और बाहरी सुरक्षा की बुनियाद पर भावी योजनाओं को अमल में लाने का संकल्प जताया। फल-सब्जी-फूल पट्टी विकसित करने को नौजवानों को बैंकों की मदद से माइक्रो फाइनेंसिंग सुविधा मुहैया कराई जाएगी। बजट में पीपीपी मोड से स्वास्थ्य और शिक्षा में नई पहल की गई है तो ढांचागत विकास के लिए सड़कों-पुलों, लघु जलविद्युत परियोजनाओं पर खासा जोर दिया गया है। करीब 441.84 करोड़ के राजस्व सरप्लस बजट में प्रदेश की जरूरत पूरी करने की उम्मीद बंधाई गई है। नए बजट में दीपावली पर्व पर बिकने वाले शक्कर निर्मित कुलिया, खिलौने, बताशे को कर मुक्त किया गया। रोड साइड ढाबों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों एवं रेस्टोरेंट व फूड प्वाइंट्स पर भोजन सस्ता मिलेगा। पके भोजन पर 13.5 फीसदी वैट उक्त स्थानों पर महज चार फीसदी की दर से वसूल किया जाएगा। इन केंद्रों की बिक्री सालाना 50 लाख रुपये तक होनी चाहिए। उक्त कारोबारियों के लिए एकमुश्त समाधान राशि योजना की अवधि बढ़ाकर 31 मार्च, 2005 की गई है। उद्यान छातों को छोड़कर सभी प्रकार के छाते वैट कर से मुक्त किए गए हैं। सीएफएल बल्ब और ट्यूब पर वैट 13.5 फीसदी से घटाकर 4.5 फीसदी होगा। किसानों को पांच लाख के कृषि लोन पर स्टांप ड्यूटी से छूट दी गई है। छोटे कारोबारियों को मोमबत्ती पर 4.5 फीसदी वैट नहीं देना होगा। ऊर्जा क्षेत्र के लिए 599 करोड़ एवं वैकल्पिक ऊर्जा के लिए 12.60 करोड़ बजट प्रावधान है। टिहरी जिले में 2.40 मेगावाट क्षमता की पवन ऊर्जा आधारित पहली विद्युत परियोजना जल्द शुरू होगी। चार धाम यात्रा के रास्तों पर पैदल तीर्थयात्रियों, साधु-संतों के लिए रैन बसेरों का निर्माण व साधारण चना-चबेना की व्यवस्था का प्रावधान किया गया है। चार धाम उपासना केंद्रों व मार्गो को साफ-सुथरा बनाने के साथ ही बदरीनाथ धाम के लिए जोशीमठ से आगे, केदारनाथ धाम के लिए गौरीकंुड से आगे, गंगोत्री के लिए हर्षिल से आगे व यमुनोत्री के लिए जानकीचट्टी से आगे बीड़ी-सिगरेट, तंबाकू, शराब आदि मादक पदार्थ व पालीथीन पर रोक लगाने का प्रस्ताव किया गया है। 50 फीसदी से ज्यादा अल्पसंख्यक आबादी वाले गांवों में अवस्थापना कार्यो के लिए अल्पसंख्यक उपयोजना संचालित होगी। सड़कों, पुलों व लोक निर्माण, आवास एवं शहरी विकास केंद्रपोषित योजनाओं व अन्य योजनाओं से नियोजित ढंग से किया जाएगा। 5000 शहरी युवाओं के लिए उत्थान योजना शुरू की गई है। शिक्षा में कुछ प्राइमरी स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम में पीपीपी मोड में संचालित किया जाएगा। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए प्रत्येक स्तर पर कंप्यूटरीकरण किया जाएगा। शैक्षिक योग्यता के आधार पर बेरोजगारी भत्ता देने, खनन क्षेत्रों के सर्विलांस व पर्यावरणीय प्रभाव आकलन समेत प्रबंधन योजना बनाई जाएगी। दून व हल्द्वानी में अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम का निर्माण प्रस्तावित किया गया है। इससे पूर्व महंगाई के मुद्दे पर नियम-310 के तहत चर्चा की मांग पर अड़े विपक्ष ने गुरुवार को पूरे दिन सदन नहीं चलने दिया। विपक्षी विधायक वेल में आकर नारेबाजी करते रहे, जिसके चलते स्पीकर को सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। भाजपा विधायकों ने सदन के बाहर भी सांकेतिक धरना दिया।

पेयजल से वंचित हैं हरियाणा की 950 बस्तियां


हरियाणा के लोग इस समय पीने के पानी का जबरदस्त संकट झेल रहे हैं। प्रदेश के दक्षिणी भाग में पेयजल उपलब्धता की स्थिति बेहद विकट है। विशेष रूप से राजस्थान के साथ लगते भिवानी, महेंद्रगढ़ और मेवात इलाकों में पीने का साफ पानी उपलब्ध नहीं है। प्रदेश के विभिन्न भागों में पेयजल की उपलब्धता के भारी अंतर को यदि नजरअंदाज कर भी दिया जाए तो 950 बस्तियां और गांव ऐसे हैं, जहां पानी की जबर्दस्त कमी है। इन गांवों में पीने के पानी की किल्लत को दूर करने के लिए 504 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। प्रदेश के उत्तरी भाग में पेयजल के पर्याप्त साधन हैं। दक्षिण में पानी न सिर्फ खारा है, बल्कि 60 प्रतिशत भू-जल अधिक गहरा और पीने लायक नहीं है। केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार ग्रामीण इलाकों में 40 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन और शहरी क्षेत्र में 135 लीटर पानी प्रति व्यक्ति प्रतिदिन उपलब्ध होना जरूरी है। प्रदेश में इस मानक के हिसाब से जलापूर्ति नहीं हो रही है। ग्रामीण इलाकों में कहीं 20 लीटर तो कहीं 60 लीटर पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। शहरी इलाकों में कहीं 100 लीटर तो कहीं 145 लीटर भी जलापूर्ति है। सबसे अधिक परेशानी राजस्थान से सटे रेतीले व बंजर इलाके में हो रही है। लिहाजा नारनौल ब्रांच नहर से पेयजल आपूर्ति के लिए 127.4 करोड़ रुपये की योजना तैयार की गई है। इस योजना पर काम जून के पहले सप्ताह में आरंभ होगा। पिछले साल इन गांवों में पेयजल आपूर्ति के लिए केंद्र ने 214 करोड़ रुपये दिए थे। इस बार 239 करोड़ रुपये हासिल हुए हैं। राज्य के संसाधनों से 265 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है। प्रदेश की जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी मंत्री किरण चौधरी ने राज्य में पेयजल की किल्लत का मुद्दा ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश के सामने भी उठाया है। किरण चौधरी का दावा है कि राज्य सरकार प्रभावी जल आपूर्ति प्रणाली पर जोर दे रहीे है।

पेट्रोल के दाम घटेंगे, सीएनजी के बढें़गे


चुनाव की तैयारी कर रही सरकारें बजट में किस प्रकार की लोकलुभावन योजनाओं की झड़ी लगाती हैं, शीला दीक्षित का बजट उसकी एक बेहतरीन बानगी है। दिल्ली विधानसभा में सोमवार को पेश वित्त वर्ष 2012-13 के 33436 करोड़ रुपये के बजट प्रस्तावों में वित्त विभाग संभालने वाली मुख्यमंत्री ने दिल्ली के गरीबों, अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, छात्रों, महिलाओं आदि को लुभाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी है। मुख्यमंत्री ने पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि से परेशान शहर के मध्यम वर्ग को राहत देते हुए बढ़ी हुई कीमतों पर लगने वाले 20 प्रतिशत वैट की राशि नहीं लेने का ऐलान किया है। इससे दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें 1.26 रुपये प्रति लीटर कम हो जाएंगी। बजट पास होने के बाद दिल्ली में पेट्रोल 73.18 रुपये प्रति लीटर के बदले 71.92 रुपये प्रति लीटर बिकेगा। लेकिन बड़ी चतुराई से दीक्षित ने सीएनजी पर पहली बार पांच प्रतिशत की दर से वैट लगाने का प्रस्ताव किया है। इससे शहर में सीएनजी की कीमतों में प्रति किलो 1.77 रुपये की वृद्धि हो जाएगी। पेट्रोल की कीमतों में कमी से सरकार को प्रतिवर्ष 140 करोड़ रुपये का घाटा होगा, जबकि सीएनजी पर पांच प्रतिशत की दर वैट लगाने से करीब 100 करोड़ रुपये का मुनाफा होगा। मुख्यमंत्री ने दिल्ली को देश का पहला केरोसिन मुक्त शहर बनाने का ऐलान करते हुए रसोई में केरोसिन का इस्तेमाल करने वाले 1.75 लाख परिवारों को एकमुश्त दो हजार रुपये देने की घोषणा की है जिससे कि वे एलपीजी कनेक्शन ले सकें। गरीबों पर मेहरबानी दिखाते हुए दीक्षित ने अन्नश्री योजना शुरू करने की घोषणा की है। इसके तहत दिल्ली में रहने वाले दो लाख परिवारों को प्रतिमाह 600 रुपये की अन्न सब्सिडी दी जाएगी। इसके लिए बजट में 150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। राजधानी के बक्करवाला में एक शैक्षिक केंद्र स्थापित करने की घोषणा की गई है। इसके अलावा अनुसूचित जाति, जनजाति, अल्पसंख्यकों तथा अन्य पिछड़ा वर्ग से ताल्लुक रखने वाले लोगों के लिए स्वरोजगार योजना शुरू करने की घोषणा भी की गई है। इसके तहत रोजगार शुरू करने के इच्छुक इन तमाम वर्गो के लोगों को पांच लाख रुपये तक का कर्ज सरकार की ओर से दिया जाएगा। अल्पसंख्यक बहुलता वाले जिलों में 150 आंगनवाड़ी केंद्र तथा 15 जेंडर रिसोर्स सेंटर खोलने की भी घोषणा की है। अल्पसंख्यक समुदायों के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए मिशन कंवर्जेश के माध्यम से भी 10 नए केंद्र शुरू किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने बुराड़ी, अंबेडकर नगर, हस्तसाल, सिरसपुर, मादीपुर, सरिता विहार तथा द्वारका में नए अस्पताल खोलने का भी ऐलान किया है। एचआइवी संक्रमित लोगों को भी सरकार इलाज के लिए एक हजार रुपये प्रतिमाह देगी। इस बीमारी से संक्रमित बच्चों को सरकार 2050 रुपये प्रतिमाह देगी। बजट भाषण में दीक्षित ने कहा कि दिल्ली सरकार ने वर्ष 2011-12 में ही 110 करोड़ रुपये का एक आरोग्य कोष बनाया है। दो लाख रुपये प्रतिवर्ष आय वाले लोगों को इलाज के लिए इस कोष से मदद की जाएगी। उन्होंने प्राइवेट-पब्लिक पार्टनरशिप के तहत दिल्ली में 100 डायलिसिस मशीनें लगाने की भी घोषणा की। सरकारी तथा सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले पहली से पांचवीं कक्षा तक के छात्र-छात्राओं को कॉपी-किताब आदि खरीदने के लिए प्रतिवर्ष 300 रुपये तथा छठी से आठवीं कक्षा तक के छात्र-छात्राओं को 400 रुपये प्रतिवर्ष दिए जाएंगे। दिल्ली के कटराओं में रहने वाले लोगों को सुविधा देते हुए बजट में दीक्षित ने इन कटरों के विकास के लिए पांच करोड़ रुपये की राशि आवंटित करने की घोषणा की है। शहर की पुनर्वास कालोनियों में रहने वाले लोगों पर मेहरबानी दिखाते हुए मुख्यमंत्री ने 44 कालोनियों के मूल आवंटियों को उनके मकानों का मालिकाना हक देने का भी ऐलान किया है। दिल्ली के शहरीकृत गांवों के विकास के लिए 53 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, वहीं अन्य गांवों के विकास के लिए 192 करोड़ रुपये की राशि आवंटित करने का प्रस्ताव किया गया है। दो हजार इको क्लब को दी जाने वाली सहायता राशि को 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये करने की घोषणा की गई है। दीक्षित ने 1800 करोड़ रुपये की लागत से बापरौला के 77 एकड़ क्षेत्र में एक ज्ञान आधारित औद्योगिक पार्क विकसित किए जाने की भी घोषणा की है। उन्होंने सिंगापुर के सहयोग से जौनापुर इलाके में एक विश्वस्तरीय ग्रीन फील्ड कुशलता उन्नयन केंद्र खोलने का भी प्रस्ताव किया है।

Monday, May 28, 2012

यूपी में महामाया नहीं अब लक्ष्मीबाई पेंशन योजना


उत्तर प्रदेश सरकार ने मायावती शासनकाल की बहुप्रचारित महामाया गरीब आर्थिक मदद योजना का नाम बदल दिया है। अब इसको रानी लक्ष्मीबाई पेंशन योजना के नाम से जाना जाएगा। सरकार ने फिलहाल योजना के प्रारूप में कोई परिवर्तन नहीं किया है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रिपरिषद की बैठक में इसे मंजूरी दी गई। रानी लक्ष्मीबाई पेंशन योजना में चयनित लाभार्थियों को 400 रुपये प्रतिमाह की दर से धनराशि दी जाएगी। यह धनराशि हर छह माह पर लाभार्थियों के खाते में डाली जाएगी। खाता परिवार की महिला मुखिया के नाम से होगा। महिला न होने की स्थिति में ही पुरुष मुखिया को लाभार्थी बनाने का प्राविधान किया गया है। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2012-13 में योजना के तहत लगभग 25,75,000 परिवारों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस पर लगभग 1289 करोड़ रुपये का व्यय संभावित है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले ऐसे परिवार जो बीपीएल सूची में शामिल होने से छूट गए हैं और जिन्हें बीपीएल राशन कार्ड, अंत्योदय योजना या किसी अन्य पेंशन योजना का लाभ प्राप्त नहीं हो रहा है, को रानी लक्ष्मीबाई पेंशन योजना से आच्छादित किया जाएगा। योजना के माध्यम से 50 प्रतिशत अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लाभार्थियों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। मंत्रिपरिषद ने योजना के अंतर्गत पात्रता के लिए पांच सदस्यों के परिवार को आधार मानते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में 19,884 रुपये शहरी क्षेत्रों में 25,546 रुपये प्रति परिवार प्रति वर्ष की अधिकतम आय सीमा निर्धारित की है। पात्र परिवारों का चयन जिला स्तरीय अधिकारी की उपस्थिति में प्रत्येक ग्राम सभा की खुली बैठक में किया जाएगा। महिला कल्याण निगम कर्मियों को भी छठवां वेतनमान यूपी महिला कल्याण निगम के कर्मियों को छठा वेतनमान दिए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। निगम कर्मियों को एक जनवरी 2011 के आधार पर वेतनमान पुनरीक्षित करते हुए वेतन संरचना का लाभ देने का निर्णय किया है। कार्मिकों के वेतन पुनरीक्षण पर आने वाले व्यय को महिला कल्याण निगम अपने संसाधनों से वहन करेगा। राज्य सरकार निगम को कोई वित्तीय सहायता उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। इसके साथ ही निगम कर्मियों को राज्य कर्मियों के अनुरूप मकान किराया एवं नगर प्रतिकर भत्ते भी दिए जाएंगे। राजस्व न्यायालयों का कंप्यूटरीकरण राजस्व न्यायालयों के कंप्यूटरीकरण के लिए धनराशि की व्यवस्था कर दी गई है। इस मद में होने वाले खर्च के लिए उत्तर प्रदेश अधिकारों का अभिलेख (कंप्यूटरीकरण) (तृतीय संशोधन) नियमावली, 2012 को प्राख्यापित किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। इससे विभिन्न राजस्व न्यायालयों के कंप्यूटरीकरण, कंप्यूटर केंद्र के सुदृढ़ीकरण, आधुनिकीकरण, अनुरक्षण एवं संचालन का कार्य तहसील कंप्यूटर केंद्र द्वारा नियमानुसार प्राप्त हो रहे शुल्क से किया जा सकेगा। किसानों की बीमा राशि अब पांच लाख रुपये यूपी सरकार ने किसानों की बीमा राशि अब एक से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दी है। राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में किसानों के हित में यह फैसला किया गया। सपा ने चुनाव घोषणा पत्र में वादा किया था कि अगर किसान खेती के कार्य से घर से निकलता है और किसी दुर्घटना जैसे करंट लगने, आकाशीय बिजली गिरने, सांप काटने, डूबने या अन्य किसी दुर्घटना से, उसकी मृत्यु हो जाती है, तो सरकार उसके परिवार को पांच लाख रुपये देना सुनिश्चित करेगी। इसके मद्देनजर मंत्रिपरिषद ने खातेदार या सहखातेदार किसानों के लिए संचालित जनता व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना के अंतर्गत बीमा की राशि एक से पांच लाख रुपये करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी। इस योजना में किसान का तात्पर्य राजस्व अभिलेखों अर्थात् खतौनी में दर्ज खातेदार/सहखातेदार से है, जिसकी आयु 12 वर्ष से 70 वर्ष में मध्य है।

Saturday, February 18, 2012

भ्रष्टाचार के विकास से जूझता बुंदेलखंड


कानपुर से वाया फतेहपुर होते हुए बुंदेलखंड की सीमा में प्रवेश करते समय लगता ही नहीं कि यह वही इलाका है जहां किसान आत्महत्या कर रहे हैं और भुखमरी से अकाल मौतें हो रही हैं। पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह का संसदीय क्षेत्र रहे फतेहपुर के तिंदवारी और उसके बाद पड़ने वाले बुंदेलखंड के गांव समृद्ध तो नहीं, लेकिन सरसब्ज जरूर दिखाई देते हैं। बिजली की लाइन, इंडिया मार्का हैंडपंप और पक्की नालियां देख अहसास होता है कि यहां काम हुआ है। बांदा नजदीक आते-आते सड़क खराब मिलती है, लेकिन कार्य प्रगति पर है। थोड़ा असमंजस में पड़ता हूं, क्या मीडिया में कुछ विद्रूप तस्वीर पेश की गई है बुंदेलखंड की, लेकिन नेशनल हाइवे से उतरकर फतेहपुर की तरफ चिल्ला पुल तक की सड़क से विकास की सच्चाई के पैबंद उधड़ने लगते हैं। सड़क बने एक साल भी नहीं हुआ कि वह उखड़ने लगी। बसपा के ताकतवर मंत्री जी यानी नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने सड़क बनवाई है और आगे भी काम चालू है। उनके रिश्तेदार और करीबी ऐसी ही सड़कों को बना-बिगाड़कर इलाके के रईसों में शुमार हो रहे हैं। सड़के आगे बनती जा रही है और पीछे उधड़ती भी जा रही है। बांदा के आस-पास की जमीनों के भाव आसमान छू रहे हैं। एक कौम विशेष के लोगों के नाम जमीन बढ़ती जा रही है। दूसरी कौम के लोगों में इसकी खासी चर्चा है और थोड़ी आशंका भी। जिस बिरादरी के लोगों की बांदा में जमीन बढ़ने की बात हो रही है उनमें भी असंतोष है, क्योंकि जमीनें या तो सिर्फ नेता जी की हैं या फिर उनके रिश्तेदारों और करीबियों की? सड़कों के निर्माण से भी लोग बहुत प्रभावित नहीं। वे कहते हैं कि सड़कें तो कुछ ठेकेदारों और चंद लोगों के विकास के लिए हैं। जिस विकास की जरूरत है, उसके लिए तो कोई सोचने वाला ही नहीं। पानी के लिए बुंदेलखंड में अब भी जान सस्ती है। कहावत है कि गगरी न फूटे, चाहे खसम मरि जाए। बांदा पहुंचने पर जमीनों के बढ़ते दाम के औचित्य पर सवालों से जूझने लगा। करीब-करीब सभी ने इसके लिए नेता जी की माया को ही जिम्मेदार ठहराया। लगातार बढ़ती गरीबी और जमीनों के बढ़ते दामों का विरोधाभास सियासत के आम आदमी से कटने की सीधी चुगली कर रहा है। प्रत्येक दो-तीन वर्ष बाद सूखे की चपेट में आने वाला बुंदेलखंड पिछले तीन सालों से लगातार सूखे से प्रभावित है। यहां बेसिक एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों की संख्या नगण्य है। जो हैं भी उनकी हालत बदतर है। गरीबी रेखा से नीचे यानी बीपीएल परिवारों की संख्या लगभग 40 प्रतिशत है। महिलाओं और गरीबों की हालत ग़ुलामों जैसी है। खनिज संपदा पर दबंगों का अवैध कब्जा है। वन विभाग और राजस्व विभाग अपनी जमीन बताकर आदिवासियों को जानवरों की तरह खदेड़ता है। विकास का यह विद्रूप चेहरा लोगों में हिकारत का भाव पैदा कर रहा है। केंद्र सरकार के पैकेज की बात लोगों ने खूब सुनी है, लेकिन उसके बारे में ज्यादा अंदाजा नहीं है। हो भी तो कैसे? पैकेज का 17 फीसदी हिस्सा तो यूपी वाले बुंदेलखंड के सात जिलों में खर्च ही नहीं हो पाया है।