Friday, December 24, 2010

दो साल में चीन को पछाड़ देंगे भारत के युवा

युवा स्फूर्ति से ओतप्रोत कामगारों का सिरमौर बनने के करीब पहुंचा देश

भारत युवा स्फूर्ति से लैस कामगारों का सिरमौर बनने के बेहद करीब पहुंच गया है। नए साल की शुरुआत होते ही हम दुनिया के बाकी देशों को पछाड़ देंगे और 750 दिनों के अंदर हमारे पास चीन के मुकाबले 2 करोड़ अधिक युवा श्रमिकों की फौज होगी। हालांकि इस उपलब्धि के साथ पेशेवर ट्रेनिंग की कमी एक बड़ी चुनौती के रुप में दस्तक दे रही है।
शहरी आवास एवं गरीबी उन्मूलन मंत्रालय (हूपा) के अधिकारियों ने नेशनल सैंपल सर्वे के 61वें दौर की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि भारत में युवा श्रमिकों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हो रहा है। भारत में 18 से 40 साल के कामगारों की संख्या लगभग 55 करोड़ तक पहुंच रही है और जनवरी तक हम चीन के 55 करोड़ युवा कामगारों की कुल संख्या से आगे निकल जाएंगे। अनुमान है कि 2012 तक युवा कामगारों की संख्या भारत में सबसे अधिक 80 करोड़ होगी जो चीन से लगभग 20 करोड़ अधिक हो सकती है। इस अच्छी खबर के साथ एक चुनौती यह है कि हमारे पास युवा श्रमिकों को ट्रेनिंग देने की सुविधा का सख्त अभाव है।
18 से 29 आयु वर्ग के जिस युवा श्रमिकों की दुनिया भर में सबसे अधिक मांग है उन्हें हम ट्रेनिंग देने में काफी पीछे हैं। भारत में इस आयु वर्ग के सिर्फ दो फीसदी श्रमिकों के पास औपचारिक ट्रेनिंग है जबकि आठ फीसदी लोग अर्द्धप्रशिक्षित हैं। इस बात पर चिंता जताते हुए हूपा मंत्री कुमारी शैलजा ने मंत्रालय को आदेश दिया है कि स्वर्ण जयंती रोजगार योजना जैसे कार्यक्रमों में तेजी लाएं।

वर्ष 2012 तक भारत में युवा कामगारों की संख्या 80 करोड़ होगी
पेशेवर प्रशिक्षण मुहैया कराने की चुनौती भी दे रही है दस्तक
18 से 29 आयु वर्ग के दो फीसदी श्रमिकों के पास औपचारिक ट्रेनिंग है

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