यमुना एक्सप्रेस वे के निर्माण के लिए सरकार ने जमीन का अधिग्रहण क्या किया, छोटे जोत के किसान भी रातों रात लखपति हो गए। मुआवजे के रूप में मोटी रकम हाथ लगी तो किसानों के मन में बंदूक,रिवाल्वर, पिस्टल, राइफल खरीदने की इच्छा जागी। हथियार का लाइसेंस हासिल करने के लिए किसान दोनों हाथों से मुआवजे का पैसा लुटा रहे हैं। बुजुगों को इकनाली और दोनाली बंदूक पसंद है तो युवा वर्ग रिवाल्वर और पिस्टल से खेलने के लिए मचल रहा है। यमुना एक्सप्रेस वे के लिये नौहझील से लेकर बलदेव तक जमीनों के अधिग्रहण के बाद किसानों पर खासा पैसा आ गया। जमीन की बिक्री होने के बाद लोगों ने हथियार के लिए आवेदन करना शुरू कर दिया। पिछले एक साल में जितने आवेदन हुए हैं उनमें से एक तिहाई से ज्यादा इसी क्षेत्र के हैं। जिले में इस समय 18 हजार से ज्यादा लाइसेंस हैं। इसमें बंदूक की संख्या साढ़े दस हजार (8100 इकनाली और 3650 दुनाली) से ज्यादा है। इकनाली टोपीदार बंदूकें करीब 575, दुनाली टोपीदार बंदूकें 440 के आसपास हैं। इसके अलावा एनपीबी रायफल 1753, एनपीबी रिवाल्वर-पिस्टल 3537, अर्द्ध स्वचालित स्पि्रंग फील्ड राइफल करीब दो दर्जन और कारबाईन लगभग 15 हैं। शहर की सिक्योरिटी एजेंसियों पर काम करने वाले लोगों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश बंदूकें मूंछ का सवाल ही हैं। देहात में हथियार रखना सुरक्षा से ज्यादा हैसियत से जुड़ा है। सार्वजनिक कार्यक्रमों, विवाह समारोहों आदि में हथियार का प्रदर्शन ग्रामीण क्षेत्र में ज्यादा है। आंकड़ों पर गौर करें तो ग्रामीण क्षेत्र में बंदूक और शहरी क्षेत्र में रिवॉल्वर और पिस्टल ज्यादा पसंद की जाती हैं। हथियार अपने साथ लेकर चलने वालों में सबसे ज्यादा राजनीतिक क्षेत्र के लोग हैं। व्यापारियों, चिकित्सकों के हथियार अधिकतर घर के अंदर या लाकर में ही रखे रहते हैं। जिले में लाइसेंस रखने वाले व्यापारियों की संख्या दो हजार से ज्यादा नहीं हैं। उल्लेखनीय है कि राज्य के कई अन्य जिले ऐसे हैं, जहां हथियार रखना शान की बात मानी जाती है। कई जगह तो लोगों ने खेत बेच कर हथियार खरीदे हैं।
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