Tuesday, March 8, 2011

शहरीकरण के नाम पर बिक रहा गंगा का उपजाऊ इलाका


उत्तर भारत में गंगा-यमुना का उपजाऊ इलाका शहरीकरण और औद्योगिकीकरण के नाम पर बेचे जा रहा है। लोकसभा में सोमवार को शून्यकाल के दौरान जद यू नेता शरद यादव ने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि शहरीकरण से देश की 27 लाख हेक्टेयर खेती वाली भूमि कम हो गई है। दुनिया की सर्वाधिक उपजाऊ भूमि के लगातार घटने को लेकर ज्यादातर सांसदों ने गंभीर चिंता जताई। यादव ने कहा कि खेती के लिए चिंता बन चुके इस तथ्य को स्वयं कृषि मंत्री शरद पवार स्वीकार कर चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही। देश में अन्न की कमी के दिनों की याद दिलाते हुए शरद यादव ने कहा कि कभी अमेरिका जैसे देशों ने गेहूं को हथियार बनाकर हमारे ऊपर दबाव बनाने का प्रयास किया था। अब हम उबर चुके हैं। लेकिन खेती योग्य भूमि के निरंतर घटने को गंभीरता से नहीं लिया गया तो फिर वहीं लौट जाएंगे। उन्होंने भूमि सुधार कानून लाए जाने में हो रही देरी पर सख्त आपत्ति जताई। यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री, सरकार के मंत्रियों और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी को उन्होंने स्वयं कई पत्र लिखे लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जद (यू) नेता ने इस मुद्दे को अति गंभीर बताते हुए प्रधानमंत्री से तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि दिल्ली से जयपुर, चंडीगढ़, आगरा, हरिद्वार, अलीगढ़, और मुरादाबाद और आसपास के तमाम इलाके दुनिया के सबसे उपजाऊ इलाके हैं। सारा क्षेत्र सड़कों व रेल से जुड़ा हुआ है, फिर भी उन्हें जोड़ने को लेकर गंगा एक्सप्रेस वे और यमुना एक्सप्रेस वे के नाम पर इन जमीनों की उर्वरता खत्म करने की कोशिश की जा रही है। यादव की बात का ज्यादातर सदस्यों ने समर्थन कियाS

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