देश के बदहाल सड़क परिवहन क्षेत्र में बदलाव की बयार देर से ही सही मगर हौले-हौले बहने लगी है। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार केंद्र सरकार ने 28 फरवरी को कैरिज बाय रोड एक्ट 2007 की नियमावली अधिसूचित कर दी। इसी के साथ पहली मार्च से नया कैरियर बाय रोड एक्ट 2007 लागू हो गया और 1865 का कैरियर्स एक्ट निष्प्रभावी हो गया। पुराने एक्ट से इतर नया एक्ट केवल सड़क परिवहन तक सीमित है। इससे इसकी धार अपेक्षाकृत तीक्ष्ण हो गई है। हालांकि अभी भी इसमें कुछ खामियां रह गई हैं, जिनसे कॉमन कैरियर्स को गड़बड़ी का मौका मिलता रहेगा। तो भी शुरुआत के तौर पर इसका स्वागत किया जाना चाहिए। नए नियमों के तहत देश में सड़क मार्ग से ढोए जाने वाले हर तरह के सामान, चाहे वह कोई वस्तु हो या कागजात, की रसीद पर बुकिंग करने वाले सभी कॉमन कैरियर्स के लिए राज्य परिवहन प्राधिकरणों में अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। चाहे वे किसी भी नाम से कारोबार कर रहे हों। कॉमन कैरियर्स में गुड्स बुकिंग कंपनियां, ट्रांसपोर्ट कांटै्रक्टर, गुड्स ट्रांसपोर्ट एजेंट, ब्रोकर, कूरियर, लॉजिस्टिक फर्मे तथा मूवर्स एंड पैकर्स आदि सभी आते हैं। इन्हें अब बुकिंग के साथ रसीद पर सामान की कीमत भी दर्ज करनी होगी। इन्हें बिना पंजीकरण के कारोबार में उतरने की इजाजत कतई नहीं होगी। आने वाली 31 मई तक पंजीकरण कराना आवश्यक है। जो इसमें विफल रहेंगे वे 31 अगस्त 2011 के बाद कारोबार नहीं कर पाएंगे। पंजीकरण उन्हीं का होगा जिनके पास कम से कम पांच लाख रुपये की नेटवर्थ, ऑफिस और गोदाम आदि का पूरा ढांचा होगा। एक्ट में राज्य परिवहन प्राधिकरण के अधिकार भी नियत किए गए हैं। यदि कॉमन कैरियर कन्साइनर को बुकिंग रसीद देने या सामान की स्थिति बताने से इंकार करता है, ठोस कारण बताए बगैर सामान रोककर रखता है, अनुचित शुल्क की मांग करता है अथवा ट्रक मालिक को तयशुदा भुगतान करने से मना करता है, तो उसकी शिकायत की जा सकती है। शिकायत मिलने पर प्राधिकरण कॉमन कैरियर को नोटिस देगा, जिसका जवाब 13 दिनों के भीतर देना होगा। संतोषजनक जवाब न मिलने पर प्राधिकरण को एक हफ्ते के लिए पंजीकरण निलंबित या रद करने का अधिकार दिया गया है। एक्ट में ओवरलोडिंग रोकने के लिए सेंट्रल मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धारा 194 के अनुसार पहले अपराध पर पांच हजार रुपये, दूसरे पर 10 हजार रुपये तथा उसके बाद इससे भी ज्यादा जुर्माने का प्रावधान किया गया है। कॉमन कैरियर्स को अपने कारोबार का तिमाही रिकॉर्ड रखना होगा। रेल फे्रट की तरह कॉमन कैरियर्स के लिए भी गुड्स फॉरवर्डिग नोट बनाना जरूरी कर दिया गया है। इसमें सामान, उसकी कीमत और भेजे जाने वाली जगह आदि का ब्योरा दर्ज होगा। इसकी एक कॉपी कन्साइनर को दी जाएगी। इसी नोट के आधार पर कन्साइनर क्षतिपूर्ति का दावा कर सकेगा। प्राकृतिक आपदा या अवैध सामान को छोड़कर अन्य किसी भी प्रकार से सामान का नुकसान होने पर कॉमन कैरियर्स को सामान की कीमत के बराबर तक क्षतिपूर्ति देनी पड़ सकती है। नए नियमों के तहत कन्साइनर उन्हीं धाराओं में सामान बुक कराने की कोशिश करेंगे जिनमें उचित क्षतिपूर्ति हासिल होने की संभावना दिखेगी। भले ही इसके लिए कुछ ज्यादा शुल्क अदा करना पड़े। अभी देश में तकरीबन ढाई लाख कॉमन कैरियर्स हैं, जो 85 फीसदी अथवा साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये के कारगो परिवहन को नियंत्रित करते हैं। आम तौर पर इन कॉमन कैरियर्स या ट्रांसपोर्ट एजेंटों के पास अपने खुद के ट्रक कम ही होते हैं और ये ज्यादातर उन्हें बाहर से आउटसोर्स करते हैं। इनकी संगठन शक्ति काफी तगड़ी है और देश भर में इनके संघ तथा महासंघ हैं। इसकी बदौलत ये छोटे ट्रक ऑपरेटरों के साथ किराए में भारी सौदेबाजी करने में सक्षम हैं। कारगो की डिलीवरी के मामले में इनका कन्साइनरों तथा व्यापारियों के साथ सीधा गठजोड़ रहता है। वैसे तो ट्रक ऑपरेटरों की भी अपनी एसोसिएशनें तथा महासंघ हैं, लेकिन अपने बेहतर सूचना तंत्र एवं वित्तीय ताकत के बल पर कॉमन कैरियर्स इन पर भारी पड़ते हैं। अधिकांश सड़क माल परिवहन पर कब्जा होने के बावजूद अब तक सरकारी रिकॉर्ड में इनकी मौजूदगी न के बराबर रही है। इससे सरकार को हर साल अरबों रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ता है। पुराना कैरियर्स एक्ट इनकी गतिविधियों को पारदर्शी बनाने और इन्हें राजस्व संग्रह के दायरे में लाने में बेअसर रहा। इसीलिए अगस्त 2007 में नया कैरियर बाय रोड एक्ट लाया गया। लेकिन कॉमन कैरियर्स की ताकतवर लॉबी की अड़ंगेबाजियों के चलते इसे अब लागू किया जा सका है। बहरहाल, नए नियम न केवल कॉमन कैरियर्स की तमाम गतिविधियों को राजस्व की जद में लाएंगे, बल्कि कन्साइनरों के साथ आए दिन होने वाली बेईमानी और धोखाधड़ी पर भी अंकुश लगाने में काफी हद तक मददगार साबित होंगे। इससे सड़क परिवहन क्षेत्र में अरसे से लंबित बुनियादी सुधारों की पहली सीढ़ी पार हो सकेगी। लेकिन सरकार को इस एक्ट के कुछ ढीले प्रावधानों को कसना होगा, वरना यह अपने उद्देश्य में पूरी तरह सफल नहीं हो पाएगा। मसलन, अंतिम नियमावली में उल्लंघन के दोषी कॉमन कैरियर्स का पंजीकरण सिर्फ एक हफ्ते के लिए रद करने का प्रावधान किया गया है, चाहे अपराध कितनी ही बार क्यों न किया गया हो। इस प्रावधान की कॉमन कैरियर्स शायद ही परवाह करेंगे। चूंकि उन्हें पंजीकरण रद होने की कोई चिंता तो होगी नहीं। इससे वे बार-बार अपराध करने को प्रेरित हो सकते हैं। इस प्रावधान से स्पष्ट है कि आखिरकार सरकार कॉमन कैरियर्स के दबाव में आ ही गई। इससे पहले 15 जून 2010 को जारी मूल नियमावली में तीसरे अपराध पर पंजीकरण रद करने का प्रावधान था।
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