नई दिल्ली को पटना से तेज रफ्तार बुलेट ट्रेन से जोड़ने की संभावना का आकलन हो रहा है। अगर योजना जमीन पर आई तो नई दिल्ली से चलकर आगरा, लखनऊ, वाराणसी होते हुए बुलेट ट्रेन पटना पहुंचेगी और उसी रूट से वापस आएगी। इस सिलसिले में ब्रिटिश कंपनी मॉट मैकडोनाल्ड को 993 किलोमीटर लंबे इस रेलमार्ग के बारे में रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। रिपोर्ट में बुलेट ट्रेन चलाने के तकनीकी, आर्थिक और व्यवहारिक पहलुओं का विस्तृत आकलन होगा। रेल मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार इस रिपोर्ट को तैयार करने में 8.8 करोड़ रुपये व्यय होने की संभावना है। कंपनी अपनी रिपोर्ट 7 महीने में रेल मंत्रालय को सौंपेगी। मौजूदा समय में नई दिल्ली-पटना के बीच सबसे तेज गति से चलने वाली ट्रेन राजधानी एक्सप्रेस है, जो 12 घंटे से ज्यादा समय लेती है। बुलेट ट्रेन से इस समय को घटाकर 5 घंटे से कम किया जा सकेगा। रेलवे ने अब तक देश में 6 रूट चिन्हित किए हैं, जहां पर 250 से 300 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली बुलेट ट्रेन चलाई जा सकती है। बुलेट ट्रेन चलाने के लिए पुणे-मुंबई-अहमदाबाद रूट का आकलन किया जा चुका है। हावड़ा और हल्दिया के बीच तथा दिल्ली-चंडीगढ़-अमृतसर के बीच तेज रफ्तार ट्रेन चलाने की संभावना पर रिपोर्ट तैयार हो रही है। इसके बाद हैदराबाद-दोर्णाकल-विजयवाड़ा-चेन्नई रूट और चेन्नई-बेंगलूर-कोयंबटूर-एर्नाकुलम रूट पर बुलेट ट्रेन चलाने की संभावना तलाशी जाएगी। देश में तेज रफ्तार ट्रेनों के संचालन के लिए रेल मंत्रालय एक नई अथॉरिटी का गठन करेगी, इसका नाम नेशनल हाई स्पीड रेल अथॉरिटी होगा। इस समय तैयार होने वाली प्रति किलोमीटर रेल रूट पर करीब 6 करोड़ रुपये का व्यय होता है, जबकि बुलेट ट्रेन चलाने के लिए आवश्यक रेल रूट को तैयार करने में 70 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर की दर से व्यय होने की संभावना है। इस लिहाज से बुलेट ट्रेन चलाने की परियोजना काफी महंगी होगी। रेल मंत्रालय इसे प्रदेश सरकार और निजी क्षेत्र के सहयोग से क्रियान्वित करने पर विचार कर रहा है। उम्मीद है जल्दी ही परिणाम सामने आएंगे|
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