उत्तर प्रदेश के ज्यादातर जिलों में शायद ग्रामीण सड़कों की जरूरत नहीं है। यही वजह है कि राज्य सरकार ने 73 जिलों में सिर्फ 29 जिलों में ही ग्रामीण सड़कें बनाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेजा है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के आग्रह के बावजूद राज्य सरकार की ओर से अन्य जिलों के प्रस्ताव नहीं भेजे गए। लिहाजा, केंद्र ने राज्य के प्रस्तावों के हिसाब से 514 सड़कों के लिए 342 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने सड़कों की मंजूरी के बारे में सूचित करते हुए मुख्यमंत्री मायावती को एक पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने राज्य के गांवों को सड़कों से जोड़ने और उनके रखरखाव के बारे में जानकारी मांगी है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत बनने वाली इन सड़कों की लागत 342 करोड़ रुपये आएगी। राज्य के एक मात्र नक्सल प्रभावित सोनभद्र जिले की कुल 41 सड़कों के लिए 54.74 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसी तरह मिर्जापुर, आगरा और प्रतापगढ़ की 52 सड़कों के लिए 27.82 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। केंद्र सरकार जहां राज्य में विधानसभा चुनाव को देखते हुए अधिक से अधिक जिलों में सड़कों के लिए धन भेजने को तैयार है। वहीं, राज्य सरकार ने कुछ चुनिंदा जिलों का प्रस्ताव भेजकर छुट्टी पा ली है। जयराम रमेश ने कहा कि मैं राजनीति में नहीं पड़ना चाहता हूं। इसीलिए डेढ़-दो महीने तक राज्य सरकार को और जिलों के प्रस्ताव का इंतजार कर रहा था। ग्रामीण सड़कों के लिए राज्य के सांसदों का लगातार दबाव पड़ रहा था। लेकिन राज्य की ग्रामीण सड़कों के बारे में केंद्र अपनी ओर से कोई पहल नहीं कर सकता है। इसके लिए राज्य की ओर से ही प्रस्ताव आते हैं, जिसे ग्रामीण विकास मंत्रालय मंजूरी देता है। सभी राज्यों का अपना कोर नेटवर्क होता है, जिसके आधार पर ग्रामीण सड़कों को चिह्नित किया जाता है। पीएमजीएसवाई की सड़कों के लिए सभी राज्यों के प्रस्तावों को मंजूरी कब की मिल चुकी है। बिहार और झारखंड जैसे राज्यों के भी पुराने मामले निपट चुके हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश की ओर से कोई सकारात्मक पहल न होने से स्थितियां ठीक नहीं हैं।
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