सिगरेट की गिरफ्त में मेट्रो के 80 फीसदी युवा
कानून और पैकेट पर लिखी चेतावनी नाकाफी
एनसीआर के किशोर हैं सिगरेट पीने में आगे
किशोरों पर किए गए एसोचैम के सर्वे में सामने आए चौंकाने वाले निष्कर्ष
नई दिल्ली। धूम्रपान की लत शहरी किशोरों की सेहत में जबरदस्त सेंध लगा रही है। एसोचैम की मानें तो मेट्रो शहरों के 14 से 19 साल के करीब 80 फीसदी किशोर सिगरेट पीने की आदतों के शिकार हैं। यही नहीं, प्रतिदिन 600 किशोर सिगरेट पीने की खतरनाक शुरूआत कर रहे हैं। यह चौंकाने वाली हकीकत एसोचैम के सर्वे में सामने आई है।
एसोचैम ने किशोरों में धूम्रपान की स्थिति को जानने के लिए नवंबर, 2010 से जनवरी, 2011 के बीच मेट्रो शहरों के स्कूलों और कॉलेजों के 14 से 19 वर्ष के आयु वर्ग के करीब 3,000 लड़के-लड़कियों पर यह अध्ययन किया। इसमें मुंबई, गोवा, कोच्चि, चेन्नई, हैदराबाद, इंदौर, पटना, पुणे, दिल्ली, चंडीगढ़ और देहरादून आदि शहरों को शुमार किया गया। सर्वे के मुताबिक दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में किशोरों पर सिगरेट का रंग कुछ ज्यादा ही चढ़ा हुआ है। इसके बाद मुंबई, बंगलूरू, पुणे, चंडीगढ़, चेन्नई, और हैदराबाद के किशोरों का नंबर आता है। अध्ययन के जो चौंकाने वाले निष्कर्ष आए उसके मुताबिक धूम्रपान के आदी पांच किशोरों में से एक प्रतिदिन 13 से 15 सिगरेटों को धुएं में उड़ा देता है।
सर्वे किशोरों में सिगरेट के चलन बढ़ने की मुख्य वजह माता-पिता का धूम्रपान करना, सिगरेट की आसानी से उपलब्धता, उसकी कीमत का कम होना, समवयस्क लोगों की देखादेखी और माता-पिता के बच्चों का कम ध्यान रखने आदि को मानता है।
सर्वे के मुताबिक बच्चे 14 से 16 वर्ष की उम्र में ही अपने स्कूलों में सिगरेट आजमा लेते हैं। प्रतिदिन लगभग 600 बच्चे धूम्रपान की शुरूआत करते हैं। सिगरेट पीने वाले किशोरों में से 20 फीसदी लड़कों को बाकायदा सिगरेट की लत लग चुकी है वहीं छह से दस फीसदी किशोरियां नियमित रूप से सुट्टे लगाती हैं। 94 फीसदी सिगरेट पीने वाले किशोरों को दुकान वाले बिना उनकी उम्र पूछे, बिना टोके सिगरेट दे देते हैं , जबकि 18 साल से कम उम्र के बच्चों को सिगरेट बेचना कानूनन जुर्म है। सिगरेट पर लिखी चेतावनी और उस पर छपी कैंसर की तस्वीर भी किशोरों को सिगरेट पीने से नहीं रोक पा रही है। एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने कहा कि बच्चों के सिगरेट पीने के मामले में माता-पिता सबसे बड़े गुनहगार हैं। उन्हें अपने बच्चों को धूम्रपान के खतरों से वाकिफ कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिगरेट पीने के लिहाज से 15 साल की उम्र किशोर या किशोरी के लिए काफी नाजुक होती है। इसी उम्र में अधिकांश किशोर पहली बार सिगरेट को सुलगाकर होठों तक ले जाते हैं।
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