Monday, February 21, 2011

भूमि अधिग्रहण बिल की राह में अभी कई रोड़े


विवादों और अवरोधों से लगातार अटके रहे भूमि अधिग्रहण विधेयक को सरकार परवान चढ़ाने की कोशिश में भले ही लगी हो, मगर राह अब भी आसान नहीं है। मुकेश अंबानी के प्रस्तावित विशेष आर्थिक जोन (सेज) पर लगी रोक का स्वागत करते हुए जदयू अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि केंद्र सरकार के भूमि अधिग्रहण विधेयक में कई खामियां हैं। लिहाजा वह इसका विरोध करेंगे। शरद से पहले सरकार में मुख्य घटक तृणमूल कांग्रेस पहले ही इस विधेयक में मीन-मेख निकाल चुकी है। लंबी कवायद के बाद तैयार हुए भूमि अधिग्रहण विधेयक पर सरकार की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। शुरुआती दौर से कभी सरकार के अंदर तो कभी बाहर इसका विरोध होता रहा है। खास तौर पर निजी क्षेत्र के लिए होने वाले अधिग्रहण में सरकार की भागीदारी पर मतभेद रहे हैं। संप्रग सरकार की दूसरी सबसे बड़ी घटक तृणमूल कांग्रेस ने भी सरकार को ब्रेक लगाने के लिए मजबूर कर दिया था। तृणमूल नेत्री ममता बनर्जी अधिग्रहण को पूरी तरह भू-मालिकों के विवेक पर छोड़ना चाहती थीं। उनका कहना था कि सरकार इससे दूर ही रहे। अब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उनका रुख कितना बदलेगा यह देखने की बात होगी। इधर प्रधानमंत्री और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी विधेयक का वादा कर चुके हैं। लिहाजा बजट सत्र में इसे लाने की तैयारी है। मगर इस बार राजग संयोजक शरद यादव ने विरोध का मन बना लिया है। रविवार को उन्होंने कहा कि किसी भी तरह से कृषि योग्य भूमि के अधिग्रहण की मनाही होनी चाहिए। वर्तमान विधेयक में कई खामियां हैं। लिहाजा वह नए सिरे से इसका पूरा प्रारूप तैयार कर उसे सार्वजनिक करेंगे। शरद ने कहा कि विधेयक लाने से पहले सरकार को पहले दिल्ली से सटे तमाम सेज और फार्म हाउसों की जमीन वापस लेनी चाहिए जो कृषि के संकट को बढ़ा रहे हैं। दिल्ली-चंडीगढ़, हरिद्वार-दिल्ली, दिल्ली-अलीगढ़, दिल्ली-रोहतक जैसे मार्गो के दोनो ओर कई क्षेत्र हैं जहां कृषि योग्य भूमि का अधिग्रहण हुआ है। इसे तत्काल प्रभाव से रद किया जाना चाहिए। शरद के अनुसार बजट सत्र में भूमि अधिग्रहण के साथ-साथ कई दूसरे मुद्दों पर भी विपक्ष अपनी आवाज बुलंद करेगा।

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