Monday, February 28, 2011

गांव से शहर तक सस्ते मकानों को बढ़ावा


 एक तरफ जब बैंक होम लोन महंगा करते जा रहे हैं, तब केंद्र सरकार ने कोशिश की है कि देश में सस्ते मकानों की उपलब्धता बढ़े। आम बजट 2011-12 में ऐसी कई घोषणाएं हैं जिनसे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कम कीमत के मकानों को बढ़ावा मिलेगा। सरकार ने इस बात की भी कोशिश की है कि बैंक 25 लाख रुपये के होम लोन बांटने में ज्यादा उदारता दिखाएं। अब आप 15 लाख रुपये तक के होम लोन पर सरकार से एक फीसदी ब्याज सब्सिडी ले सकेंगे। शर्त यह है कि आपके घर की कीमत 25 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। अभी तक 20 लाख रुपये की कीमत वाला मकान खरीदने वाले को 10 लाख रुपये के होम लोन पर ब्याज सब्सिडी मिल रही थी। इस कदम से रियल एस्टेट कंपनियां कम लागत की आवासीय इकाइयों पर ज्यादा जोर देंगी। इसके साथ ही वित्त मंत्री ने 25 लाख रुपये तक के होम लोन को प्राथमिक क्षेत्र की श्रेणी में रखने का एलान किया है। अभी यह सीमा 20 लाख रुपये तक है। इस फैसले से बैंकों को सहूलियत होगी। वे कम कीमत वाले मकानों को कर्ज देने को तरजीह देंगे। इससे आम आदमी को कर्ज मिलने में आसानी होगी। वित्त मंत्री ने कहा कि उक्त दोनों कदम हाल के दिनों में रियल एस्टेट की कीमतों में वृद्धि के मद्देनजर उठाए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में मकान के लिए कर्ज देने के लिए बनी ग्रामीण आवास निधि से दी जाने वाली राशि में एक हजार करोड़ रुपये की वृद्धि की गई है। दूसरे शब्दों में कहें तो अगले वित्त वर्ष के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में तीन हजार करोड़ रुपये के होम लोन वितरित किए जाएंगे। वित्त मंत्री ने निम्न आय वर्ग (एलआइजी) के लिए आवासीय उपलब्धता बढ़ाने के लिए एक बंधक जोखिम गारंटी निधि की स्थापना का भी एलान किया है। यह आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्गो व एलआइजी परिवारों द्वारा लिए गए कर्जे को गारंटी प्रदान करेगा। इससे बैंक कमजोर वर्ग को आसानी से कर्ज दे सकेंगे। हाल ही में हुए होम लोन घोटाले को भी सरकार ने काफी गंभीरता से लिया है। यही वजह है कि वित्त मंत्री ने कहा है कि एक ही अचल संपत्ति पर एक से ज्यादा बैंकों से कर्ज लेने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक रजिस्ट्री की स्थापना की जाएगी। यह रजिस्ट्री 31 मार्च, 2011 तक काम करने लगेगी। इससे आवासीय परिसंपत्तियों की रजिस्ट्री का राष्ट्रीय डाटा तैयार हो जाएगा|

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