Friday, February 18, 2011

बिहार की मांग पर योजना आयोग की सहमति


दिल्ली से पटना वापस आने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बुधवार को खुशी जताते हुए कहा कि योजना आयोग ने बिहार के योजना आकार में 20 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी देते हुए इसे 24 हजार करोड़ करने पर हरी झंडी दे दी है। इसके साथ ही योजना आकार को बढ़ाने की बिहार की मांग पूरी हो गई है। 

गौरतलब हो कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया के साथ मंगलवार को नई दिल्ली में हुई बैठक में इस पर सहमति बनी थी। राष्ट्रीय सम विकास योजना के तहत 3145 करोड़ की राज्य की मांग भी मान ली गई है। खास बात यह है कि पिछले सालों की तुलना में 2011-12 के योजना आकार में राज्य के अपने संसाधन बढ़े हैं, वहीं केन्द्रीय सहायता में कमी आई है। 2004-05 में केन्द्रीय सहायता 70 फीसदी थी, जो इस बार 32 फीसदी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में विकास की मुख्य प्राथमिकता आधारभूत संरचना ही होगी। मांग के अनुरूप योजना की स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री ने योजना आयोग के उपाध्यक्ष के प्रति आभार व्यक्त किया। योजना आयोग के साथ हुई बैठक में उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य में कई क्षेत्रों में काम हो रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा के साथ ही बुनियादी ढांचे में वृद्धि पर भी राशि खर्च हो रही है। ऐसे में राज्य के विकास की रफ्तार को बनाए रखने के लिए योजना ओकार में वृद्धि बेहद जरूरी है। 

उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने योजना आकार को 24 हजार करोड़ किए जाने पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि बिहार के पक्ष को गौर से सुना गया। उपमुख्यमंत्री ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले छह साल में बिहार का बजट छह गुना बढ़ा है। 2004-05 में राज्य की योजना बजट महज 4 हजार करोड़ थी। नीतीश सरकार ने अगले वित्तीय वर्ष की अपनी प्राथमिकताएं भी तय कर दी है। सरकार सबसे अधिक सामाजिक क्षेत्र पर खर्च करेगी। सरकार ने सड़क और परिवहन, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण के साथ बिजली व कृषि को अपनी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखा है। 2006-07 में राज्य की योजना बजट जहां 8670 करोड़ रुपए का था वहीं 2010-11 में यह बकाया कर 20 हजार करोड़ रुपए का हो गया। 1990 में राज्य की योजना बजट 1262 करोड़ था। आगामी वर्ष में बिहार का बजट 24 हजार करोड़ का होगा जो 1990 की तुलना में बीस गुना ज्यादा का होगा। दिल्ली से वापस आने के बाद उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि उनकी सरकार हर कीमत पर बिहार के विकास को जारी रखना चाहती है। बिहार के हक के लिए हर वह लड़ाई लड़ी जाएगी और बिहार के हित की रक्षा की जाएगी। विशेष राज्य के दर्जा देने की मांग के बावत उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी से मिल कर इस मुतल्लिक अपनी बातें रखे हैं। केन्द्र सरकार को हर संभव मदद देनी चाहिए जिससे कि आने वाले सालों में बिहार भी विकसित राज्यों की कतार में खड़ा हो सके। वित्त मंत्री से मुख्य रूप से विशेष राज्य का दर्जा देने, बीआरजीएफ विशेष योजना के तहत 3145 करोड़ की अतिरिक्त सहायता, शिक्षा के अधिकार कानून को लागू करने में 90 फीसदी राशि देने, बैंकों द्वारा कर्ज की रफ्तार बढ़ाने,13 वें वित्त आयोग में बिहार की हिस्सेदारी बढ़ाने, झारखंड से ब्याज की राशि दिलाने, क्रेडिट सीमा बढ़ाने आदि की मांगे की गई।

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