तिहाड़ में सजा काट रहे कैदी जल्द ही नामी कंपनियों के साथ काम करते नजर आएं तो हैरान न हों। ऐसा वाकई होने जा रहा है। कैदियों के पुनर्वास की दिशा में जेल प्रशासन व करीब 10 नामी कंपनियों के बीच इस बाबत सहमति भी बन गई है कि वे पढ़े लिखे एवं हुनरमंद कैदियों को अपने यहां रोजगार देंगी। शनिवार को इस बाबत जेल परिसर में ही इन कंपनियों के प्रतिनिधियों को कैदियों का इंटरव्यू करने के लिए भी बुलाया गया है। धम्म (आश्रम) के नाम से विख्यात तिहाड़ में कैदियों के पुनर्वास की दिशा में विभिन्न व्यवसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम तो चलाए ही जा रहे हैं, जेल से रिहा होने के बाद वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें, इस दिशा में भी जेल प्रशास न द्वारा समय-समय पर प्रयास किए जाते रहे हैं। इस कड़ी में अग्रवाल पैकर्स एंड मूवर्स सहित कई जगह तिहाड़ के दर्जनों कैदियों को पहले भी रोजगार दिया जा चुका है। लेकिन अब प्रशासन ने अपने इसी प्रयास को और तेज करते हुए कई अन्य कंपनियों के साथ भी करार किया है। तिहाड़ के कानून अधिकारी सुनील गुप्ता ने बताया कि कैदियों को रिहाई के बाद रोजगार देने के लिए आइडीबीआइ बैंक, वेदांता समूह, फ्लैक्स शूज, स्टरलाईट फाउंडेशन, जिंदल स्टील, अग्रवाल पैकर्स एंड मूवर्स सहित लगभग दस कंपनियों से सहमति बन गई है। इन कंपनियों के लिए तकरीबन 50 ऐसे कैदि यों की सूची भी तैयार कर ली गई है जो पढ़े लिखे, हुनरमंद और अनुशासित होने के साथ-साथ जल्द ही जेल से रिहा भी होने वाले हैं। उक्त कंपनियों के प्रतिनिधि शनिवार (5 फरवरी) को तिहाड़ परिसर में ही इन कैदियों का इंटरव्यू कर इनका चयन कर लेंगे। गुप्ता के मुताबिक इन सभी कैदियों ने इग्नू से अपनी पढ़ाई पूरी की है। कुछ ने तो एमए, एमबीए और एमसीए तक किया हुआ है। गुप्ता बताते हैं कि जेल प्रशासन के इस प्लेसमेंट अभियान से एक ओर जहां कैदियों सम्मान पूर्वक जीवन जीने का अवसर मिलता है वहीं उन्हें अपराध की दुनिया से दूर रहने में भी खासी मदद मिलती है।
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