शिक्षा, स्वास्थ्य, आईटी और पूर्वोत्तर में निवेश की अपार संभावनाएं
दुनिया भर से आए प्रवासी भारतीयों से केंद्र सरकार ने भारत के विकास का हिस्सा बनने का आह्वान किया है। राजधानी में शुरू हुए प्रवासी भारतीय सम्मेलन के पहले दिन शुक्रवार को सरकार ने प्रवासी भारतीयों से कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, आईटी व पूर्वोत्तर में निवेश की अपार संभावनाएं मौजूद हैं और उन्हें इन क्षेत्रों में निवेश करना चाहिए।
विज्ञान भवन में आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन प्रवासी मामलों के केंद्रीय मंत्री वायलार रवि ने विदेशों में बसे ढाई करोड़ प्रवासी भारतीयों से देश को विकास के रास्ते पर आगे ले जाने के लिए विशेष भूमिका निभाने का आग्रह किया। इस मौके पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में सुधार कार्यक्रमों पर तेजी से अमल करने के लिए कई कदम उठाए जा चुके हैं और तीन विधेयक संसद में लंबित हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि ये विधेयक शीघ्र ही पारित हो जाएंगे। शिक्षा के क्षेत्र में अगले एक दशक में 150 अरब डॉलर की जरूरत होगी। इसमें प्रवासी भारतीयों को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
शिक्षा क्षेत्र में निवेश की संभावना पर आयोजित सत्र में प्रधानमंत्री के सलाहकार सैम पित्रोदा ने भी प्रवासी भारतीयों से कहा कि उनके लिए उच्च शिक्षा, आईटी और स्वास्थ्य के क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएं हैं, क्योंकि भारत की 50 फीसदी आबादी 25 साल से कम उम्र की है। उच्च शिक्षा में मांग के अनुरूप कॉलेज नहीं हैं। जबकि भारत को ज्यादा इंजीनियर, अध्यापक चाहिए। नौवें प्रवासी भारतीय दिवस के अनौपचारिक सत्र में मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को भारतवंशियों के लिए एक विशेष वेबपेज की शुरुआत कर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में वापसी के लिए विदेशों में बसे भारतीयों को न्योता दिया। सिब्बल ने प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन के प्रतिनिधियों के लिए एक न्यूज लेटर का भी अनावरण किया। इस सम्मेलन में 51 देशों से हिस्सा लेने आए 1500 प्रतिनिधियों में शीर्ष व्यवसायी, अर्थशास्त्री और वैज्ञानिक शामिल हैं। अमेरिका से करीब 100 और मलेशिया से 200 सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल इसमें हिस्सा लेने आया है।
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