जब से अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने भारत की संसद में कहा कि भारत उभरती हुई नहीं, बल्कि उभर चुकी ताकत है तब से हर तरफ यह चर्चा छिड़ गई है कि भारत वाकई सुपर पावर है या फिर अपने निजी फायदों के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति हमें बरगला रहे हैं। भारत को सुपर पावर होने न होने को लेकर यह कोई पहली बार बहस नहीं शुरू हुई है। यह काफी उलझा हुआ और जटिल सवाल है कि भारत को सुपर पावर माना जाए या नहीं। इस जटिलता की वजह यह है कि भारत एक साथ तमाम तरह के विरोधाभासों से लैस है। मसलन एक तरफ जहां भारत की विशाल आबादी एक बड़ा संसाधन है वहीं यह तमाम बातों के लिए अभिशाप भी है। हम आबादी को संसाधन इसलिए मान सकते हैं, क्योंकि हमारी बहुत बड़ी आबादी न केवल नियंत्रण में हैं और हमारे पास उपलब्ध संसाधन इनका पेट भरने के लिए पर्याप्त हैं। हालांकि कुशल प्रबंधन के अभाव में ऐसा व्यवहार में नहीं दिख रहा। इसके अलावा हमारी राजनीतिक स्थिरता व सामाजिक एकता भी बड़ी वजह है। दुनिया में भारत के अलावा कोई ऐसा देश नहीं है तकरीबन 17 अधिकृत भाषाएं हों और 22 हजार बोलियां। इसके साथ ही दुनिया का कोई ऐसा प्रमुख धर्म नहीं है जिसके अनुयाई भारत में न रहते हों। भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और अगले 20 सालों में हम दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होंगे। भारत तेजी से एक बड़े मध्य वर्ग वाले देश के रूप में उभर रहा है। भारत में इस समय 30 अरब डॉलर से भी बड़ा लग्जरी सामानों का बाजार है और शायद ही दुनिया का कोई बड़ा ब्रांड हो जो भारत में अपने कारोबार को फोकस न करना चाहता हो। ओमेगा, रोलैक्स, टैग ह्यूवर, कार्टियर, टॉमी हिलफिगर, गुक्की, डोल्स और गब्बाना जैसे अंतरराष्ट्रीय बड़े ब्रांड आज भारत के महानगरों में ही नहीं छोटे-छोटे शहरों में भी मिल जाते हैं। लगभग 70 करोड़ मोबाइल धारकों की संख्या के लिहाज से हम चीन के बाद दुनिया में दूसरे नंबर पर हैं। भारत छोटी कारों का हब है। दुनिया की 95 फीसदी बड़ी कारें अपने शोरूम भारत में खोल रही हैं और जल्द ही हम बड़ी कारों के भी दुनिया में सबसे बड़े ग्राहक होंगे। भारत कुशल श्रमिकों का सबसे बड़ा गढ़ है। विकसित देश भी भारत की तकनीकी कुशल श्रमशक्ति की बदौलत ही अपनी श्रेष्ठता और विकसित स्थिति को बचाए हुए हैं। आने वाले 20 वर्षो में भारत पूरी दुनिया में कुशल श्रमशक्ति का सबसे बड़ा निर्यातक देश साबित होगा। जितनी तेजी से हमने आइटी इंडस्ट्री में नाम कमाया है उसे देखते हुए भविष्य का तकनीकी ताज हमारे सिर बंधने की उम्मीद है। किसी देश की सुपर सत्ता तब तक नहीं अस्तित्व पाती है जब तक वह सैन्य मामले में भी ताकतवर न हो। यही कारण है कि दुनिया के कई देश जिन्होंने अपना आर्थिक विकास तो तेजी से किया मगर सैन्य विकास और ढांचे के मामले में बड़े नहीं बन पाए उनकी सुपर सत्ता हमेशा संदेहास्पद रही। हालांकि भारत के साथ ऐसा नहीं है। भारत सैन्य शक्ति के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे ताकतवर देश है। हम भले ही अभी सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य न बने हों, लेकिन सर्वस्वीकृत परमाणु शक्ति जरूर बन चुके हैं। इसके अलावा मिसाइल शस्त्रीकरण में भी भारत दुनिया के पहले पांच प्रमुख देशों में आता है। हमारे पास मिसाइलों की एक पूरी श्रृंखला है और सबसे बड़ी बात यह है कि यह स्वदेशी तकनीक पर आधरित है और हम अमेरिका, चीन और रूस जैसे देशों के दर्जे में शामिल हैं। हाल के दिनों में हमारे लोकतंत्र की सभी प्रमुख दीवारों चाहे वह कार्यपालिका हो या न्यायपालिका अथवा चौथा खंभा मीडिया तक में गंदगी और भ्रष्टाचार की दीमक दिखी है। अब यह खतरा पैदा होता लग रहा है कि कहीं हम बनाना रिपब्लिक में न तब्दील हो जाएं, लेकिन मजबूत आधार यह है कि हम पिछले 64 सालों से निरंतर लोकतंत्र हैं और इस निरंतरता में हमें पूरा भरोसा है। किसी देश के ताकतवर होने का एक बड़ा सबूत यह होता है कि दुनिया में उसको कितना महत्व मिल रहा है? अगर पिछले एक दशक को देखें तो लगातार भारत को विश्व के राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण देश के रूप में मान्यता मिल रही है। इसका सबसे बड़ा पैमाना भारत में पिछले एक दशक में विश्व के बड़े राजनेताओं, शासनाध्यक्षों और राष्ट्रप्रमुखों की यात्राएं हैं। पिछले एक दशक में भारत में जितने प्रमुख देशों के राष्ट्राध्यक्ष अथवा शासनाध्यक्ष आए हैं उतने और किसी देश में नहीं। यह महज शिष्टाचार यात्राएं भर नहीं थीं, बल्कि इनके बड़े आर्थिक और राजनीतिक लक्ष्य थे। गोल्डमैन एंड सैक्स के मुताबिक वर्ष 2050 तक भारतीयों की प्रति व्यक्ति आय तकरीबन 35 गुना बढ़ जाएगी और और भारतीय अर्थव्यवस्था जापानी अर्थव्यवस्था के मुकाबले 500 फीसदी बड़ी हो चुकी होगी। भारत की आर्थिक मजबूती हमारे लोगों के रहन-सहन में भी दिखता है। पिछले एक दशक में भारत में हवाई सफर करने वाले यात्रियों की संख्या में 400 फीसदी का इजाफा हुआ है और सालाना पर्यटन के लिए निकलने वाले लोगों की संख्या में 300 फीसदी इजाफा हुआ है। भारत जिस अंदाज में अपना आर्थिक, राजनीतिक और तकनीकी वर्चस्व कायम कर रहा है उससे किसी को शक नहीं है कि दुनिया क्यों उभरते हुए भारत को सलाम करना चाहती है? हालांकि भारत के साथ अभी भी तमाम ऐसी मूलभूत खामियां जुड़ी हुई हैं जो हमें एक कमजोर और लाचार देश साबित करती हैं। इतिहासकार और समाजशास्त्री रामचंद्र गुहा ऐसे 10 बिंदुओं की तरपफ हमारा ध्यान आकर्षित करते हैं जो हमारे सुपर पावर बनने में बड़ी बाधा साबित हो सकते हैं। पहला यह कि आज भारत जबरदस्त आंतरिक सुरक्षाजन्य चुनौतियों से रू-ब-रू है। भ्रष्टाचार दिन पर दिन अपना मुंह सुरसा के बदन की तरह बढ़ रहा है। सार्वजनिक निकायों का क्षरण हो रहा है, गरीबों और अमीरों के बीच लगातार खाई चौड़ी हो रही है। लगातार पर्यावरण विनाश हो रहा है और भारत का चुनावी ढांचा जड़ता का शिकार है। सरहदों पर बेचैनी बढ़ रही है और हमारे पड़ोसी अस्थिरता के शिकार हो रहे हैं। मीडिया और न्यायपालिका की विश्वसनीयता कम हो रही है। यह वो लक्षण हैं जो हमारे गहराते मर्ज के लक्षणों को व्यक्त करते हैं। सवाल है भारत जैसी उभरती हुई ताकत को इन रोगों का निदान कैसे सकता है? यदि नौकरशाही, राजनीति और मीडिया को ईमानदार बना दें तो इनका इलाज संभव है। बुद्धिजीवी, पत्रकार, उद्योगपति और न्यायाधीश यदि कमर कस लें तो भारत न सिर्फ दुनिया का सबसे ताकतवर देश बन सकता है, बल्कि उसे महान देश बनने से भी कोई नहीं रोक सकता। (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)
Wednesday, January 26, 2011
भारत की महाशक्ति बनने की डगर
जब से अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने भारत की संसद में कहा कि भारत उभरती हुई नहीं, बल्कि उभर चुकी ताकत है तब से हर तरफ यह चर्चा छिड़ गई है कि भारत वाकई सुपर पावर है या फिर अपने निजी फायदों के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति हमें बरगला रहे हैं। भारत को सुपर पावर होने न होने को लेकर यह कोई पहली बार बहस नहीं शुरू हुई है। यह काफी उलझा हुआ और जटिल सवाल है कि भारत को सुपर पावर माना जाए या नहीं। इस जटिलता की वजह यह है कि भारत एक साथ तमाम तरह के विरोधाभासों से लैस है। मसलन एक तरफ जहां भारत की विशाल आबादी एक बड़ा संसाधन है वहीं यह तमाम बातों के लिए अभिशाप भी है। हम आबादी को संसाधन इसलिए मान सकते हैं, क्योंकि हमारी बहुत बड़ी आबादी न केवल नियंत्रण में हैं और हमारे पास उपलब्ध संसाधन इनका पेट भरने के लिए पर्याप्त हैं। हालांकि कुशल प्रबंधन के अभाव में ऐसा व्यवहार में नहीं दिख रहा। इसके अलावा हमारी राजनीतिक स्थिरता व सामाजिक एकता भी बड़ी वजह है। दुनिया में भारत के अलावा कोई ऐसा देश नहीं है तकरीबन 17 अधिकृत भाषाएं हों और 22 हजार बोलियां। इसके साथ ही दुनिया का कोई ऐसा प्रमुख धर्म नहीं है जिसके अनुयाई भारत में न रहते हों। भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और अगले 20 सालों में हम दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होंगे। भारत तेजी से एक बड़े मध्य वर्ग वाले देश के रूप में उभर रहा है। भारत में इस समय 30 अरब डॉलर से भी बड़ा लग्जरी सामानों का बाजार है और शायद ही दुनिया का कोई बड़ा ब्रांड हो जो भारत में अपने कारोबार को फोकस न करना चाहता हो। ओमेगा, रोलैक्स, टैग ह्यूवर, कार्टियर, टॉमी हिलफिगर, गुक्की, डोल्स और गब्बाना जैसे अंतरराष्ट्रीय बड़े ब्रांड आज भारत के महानगरों में ही नहीं छोटे-छोटे शहरों में भी मिल जाते हैं। लगभग 70 करोड़ मोबाइल धारकों की संख्या के लिहाज से हम चीन के बाद दुनिया में दूसरे नंबर पर हैं। भारत छोटी कारों का हब है। दुनिया की 95 फीसदी बड़ी कारें अपने शोरूम भारत में खोल रही हैं और जल्द ही हम बड़ी कारों के भी दुनिया में सबसे बड़े ग्राहक होंगे। भारत कुशल श्रमिकों का सबसे बड़ा गढ़ है। विकसित देश भी भारत की तकनीकी कुशल श्रमशक्ति की बदौलत ही अपनी श्रेष्ठता और विकसित स्थिति को बचाए हुए हैं। आने वाले 20 वर्षो में भारत पूरी दुनिया में कुशल श्रमशक्ति का सबसे बड़ा निर्यातक देश साबित होगा। जितनी तेजी से हमने आइटी इंडस्ट्री में नाम कमाया है उसे देखते हुए भविष्य का तकनीकी ताज हमारे सिर बंधने की उम्मीद है। किसी देश की सुपर सत्ता तब तक नहीं अस्तित्व पाती है जब तक वह सैन्य मामले में भी ताकतवर न हो। यही कारण है कि दुनिया के कई देश जिन्होंने अपना आर्थिक विकास तो तेजी से किया मगर सैन्य विकास और ढांचे के मामले में बड़े नहीं बन पाए उनकी सुपर सत्ता हमेशा संदेहास्पद रही। हालांकि भारत के साथ ऐसा नहीं है। भारत सैन्य शक्ति के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे ताकतवर देश है। हम भले ही अभी सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य न बने हों, लेकिन सर्वस्वीकृत परमाणु शक्ति जरूर बन चुके हैं। इसके अलावा मिसाइल शस्त्रीकरण में भी भारत दुनिया के पहले पांच प्रमुख देशों में आता है। हमारे पास मिसाइलों की एक पूरी श्रृंखला है और सबसे बड़ी बात यह है कि यह स्वदेशी तकनीक पर आधरित है और हम अमेरिका, चीन और रूस जैसे देशों के दर्जे में शामिल हैं। हाल के दिनों में हमारे लोकतंत्र की सभी प्रमुख दीवारों चाहे वह कार्यपालिका हो या न्यायपालिका अथवा चौथा खंभा मीडिया तक में गंदगी और भ्रष्टाचार की दीमक दिखी है। अब यह खतरा पैदा होता लग रहा है कि कहीं हम बनाना रिपब्लिक में न तब्दील हो जाएं, लेकिन मजबूत आधार यह है कि हम पिछले 64 सालों से निरंतर लोकतंत्र हैं और इस निरंतरता में हमें पूरा भरोसा है। किसी देश के ताकतवर होने का एक बड़ा सबूत यह होता है कि दुनिया में उसको कितना महत्व मिल रहा है? अगर पिछले एक दशक को देखें तो लगातार भारत को विश्व के राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण देश के रूप में मान्यता मिल रही है। इसका सबसे बड़ा पैमाना भारत में पिछले एक दशक में विश्व के बड़े राजनेताओं, शासनाध्यक्षों और राष्ट्रप्रमुखों की यात्राएं हैं। पिछले एक दशक में भारत में जितने प्रमुख देशों के राष्ट्राध्यक्ष अथवा शासनाध्यक्ष आए हैं उतने और किसी देश में नहीं। यह महज शिष्टाचार यात्राएं भर नहीं थीं, बल्कि इनके बड़े आर्थिक और राजनीतिक लक्ष्य थे। गोल्डमैन एंड सैक्स के मुताबिक वर्ष 2050 तक भारतीयों की प्रति व्यक्ति आय तकरीबन 35 गुना बढ़ जाएगी और और भारतीय अर्थव्यवस्था जापानी अर्थव्यवस्था के मुकाबले 500 फीसदी बड़ी हो चुकी होगी। भारत की आर्थिक मजबूती हमारे लोगों के रहन-सहन में भी दिखता है। पिछले एक दशक में भारत में हवाई सफर करने वाले यात्रियों की संख्या में 400 फीसदी का इजाफा हुआ है और सालाना पर्यटन के लिए निकलने वाले लोगों की संख्या में 300 फीसदी इजाफा हुआ है। भारत जिस अंदाज में अपना आर्थिक, राजनीतिक और तकनीकी वर्चस्व कायम कर रहा है उससे किसी को शक नहीं है कि दुनिया क्यों उभरते हुए भारत को सलाम करना चाहती है? हालांकि भारत के साथ अभी भी तमाम ऐसी मूलभूत खामियां जुड़ी हुई हैं जो हमें एक कमजोर और लाचार देश साबित करती हैं। इतिहासकार और समाजशास्त्री रामचंद्र गुहा ऐसे 10 बिंदुओं की तरपफ हमारा ध्यान आकर्षित करते हैं जो हमारे सुपर पावर बनने में बड़ी बाधा साबित हो सकते हैं। पहला यह कि आज भारत जबरदस्त आंतरिक सुरक्षाजन्य चुनौतियों से रू-ब-रू है। भ्रष्टाचार दिन पर दिन अपना मुंह सुरसा के बदन की तरह बढ़ रहा है। सार्वजनिक निकायों का क्षरण हो रहा है, गरीबों और अमीरों के बीच लगातार खाई चौड़ी हो रही है। लगातार पर्यावरण विनाश हो रहा है और भारत का चुनावी ढांचा जड़ता का शिकार है। सरहदों पर बेचैनी बढ़ रही है और हमारे पड़ोसी अस्थिरता के शिकार हो रहे हैं। मीडिया और न्यायपालिका की विश्वसनीयता कम हो रही है। यह वो लक्षण हैं जो हमारे गहराते मर्ज के लक्षणों को व्यक्त करते हैं। सवाल है भारत जैसी उभरती हुई ताकत को इन रोगों का निदान कैसे सकता है? यदि नौकरशाही, राजनीति और मीडिया को ईमानदार बना दें तो इनका इलाज संभव है। बुद्धिजीवी, पत्रकार, उद्योगपति और न्यायाधीश यदि कमर कस लें तो भारत न सिर्फ दुनिया का सबसे ताकतवर देश बन सकता है, बल्कि उसे महान देश बनने से भी कोई नहीं रोक सकता। (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)
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