भगतपुर में रहने वाले प्रदीप सिंह एमबीए कर चुके हैं, लेकिन दो साल से खाली बैठे हैं। उन्हें नौकरी मिली थी, लेकिन टारगेट पूरा न कर पाने के कारण चली गई। अब उनकी उम्मीदें होमगार्ड के लिए हो रही भर्ती पर टिक गई हैं। उनकी ही तरह होमगार्ड बनने की आस संभल के हल्लू सराय निवासी दीपक गौड़ भी लगाए हुए हैं, जो बीटेक की डिग्री की लैस हैं। कुछ ऐसी ही कहानी असमोली ब्लाक के शेखर कुमार की है। उन्होंने दो साल पहले हिंदू कालेज से एमएससी किया था। जगह-जगह से मिली नाउम्मीदी के बाद उन्हें उम्मीद है कि वह होमगार्ड बन सकते हैं। सभी बेरोजगार युवा इससे वाकिफ हैं कि होमगार्ड के रूप में उन्हें सिपाहियों के सेवक की तरह काम करना पड़ा सकता है, लेकिन फिलहाल उन्हें इसकी परवाह नहीं। शैक्षिक योग्यता से कमतर काम करने के लिए विवश इन युवाओं के अनुसार बेरोजगारी से जुड़ी इस समस्या का समाधान करना तो दूर रहा, कोई इस बारे में सोचने के लिए भी तैयार नहीं। पुलिस अस्पताल ग्राउंड में 292 होमगार्ड की भर्ती के लिए जारी प्रक्रिया में 2800 आवेदन आए हैं। इनमें से 1400 को चयन प्रक्रिया में शामिल होने की हरी झंडी मिल चुकी है। इन 1400 में शुरुआती परीक्षण के बाद छांटे गए युवाओं में डेढ़ सौ से ज्यादा ऐसे हैं जो इंजीनियरिंग या प्रोफेशनल डिग्री लिए हैं अथवा पोस्ट ग्रेजुएशन किए हुए हैं। होमगार्ड बनने के लिए सिर्फ हाईस्कूल पास होना ही काफी है। वर्तमान में होमगार्ड को महज डेढ़ सौ रुपये दैनिक वेतन मिलता है।
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