Thursday, January 6, 2011

मुनाफे में हिस्सेदारी से बदलेगी आदिवासियों की तकदीर

नक्सली समस्या से जूझ रहे आदिवासियों का भरोसा जीतने में केंद्र की मुहिम नए साल में रंग ला सकती है। खनन परियोजनाओं की वजह से जीविकोपार्जन का जरिया गंवा बैठे विस्थापितों के आर्थिक-सामाजिक उत्थान के लिए सरकार नई खनन नीति के ढांचे में उनका खास ख्याल रख रही है। इसके लिए प्रभावितों में उक्त परियोजना का 26 प्रतिशत मुनाफा बांटने का प्रस्ताव है। इस पर कैबिनेट की संस्तुति बाकी है। जिसके बाद विधेयक को संसद में पेश किया जाएगा। सरकार की यह कोशिश ऐसे समय रूप ले रही है जब खनिज संपदा वाले झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक तथा पश्चिम बंगाल में नक्सल समस्या दिनोदिन बढ़ रही है। इन राज्यों में लौह अयस्क, बाक्साइट तथा अन्य खनिज प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं। इस वजह से देसी ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भी इन्हीं राज्यों पर नजर लगाई हुई हैं। ऐसे में खनन परियोजना के चालू होने का सबसे ज्यादा प्रभाव स्थानीय लोगों पर पड़ता है। इस संकट से निपटने के लिए सरकार ने विस्थापितों को परियोजना के मार्फत मिलने वाली आर्थिक मदद से उनका आर्थिक और सामाजिक स्तर और सुदृढ़ करने का विचार बनाया है। नए माइंस एंड मिनरल डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन (एमएमडीआर) एक्ट, 2010 में सरकार की विस्थापितों के बीच 26 प्रतिशत मुनाफा बांटने की बात उद्योग जगत के गले से नीचे नहीं उतर रही है। वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में बने मंत्रियों के समूह (जीओएम) की बैठकों का लब्बोलुआब मुनाफा बांटने के पेंच पर ही केंद्रित रहा। हालांकि, नए खनन विधेयक में डिस्टि्रक्ट मिनिरल फाउंडेशन बनाने का प्रस्ताव भी किया गया है। इसके जरिए विस्थापित लोगों को आर्थिक मदद पहुंचने की रूपरेखा तैयार की गई है। सरकार ने खदान बंद होने व खनन फर्म के घाटा झेलने की सूरत में भी विस्थापितों की आमदनी बरकरार रखने की तरकीब निकाली है। ऐसे में जमीन अधिग्रहण से प्रभावित विस्थापितों को मुआवजा मिलने से उनकी जिंदगी में नई उमंग भर जाएगी। सरकार ने मुआवजे के रूप में राज्य को अदा की जाने वाली रायल्टी राशि के बराबर विस्थापितों को आर्थिक मदद मुहैया कराने का प्रस्ताव किया है। उल्लेखनीय है कि मंत्रिसमूह ने पहले खनन परियोजनाओं के विस्थापितों को 26 फीसदी इक्विटी देने के विकल्प पर विचार किया था। लेकिन इसे लेकर उद्योग जगत की तरफ से कड़ा विरोध झेलने के बाद सरकार विस्थापितों की बेहतरी के लिए खनन परियोजनाओं के मुनाफे में उन्हें हिस्सेदार बनाने का प्रस्ताव लेकर आई है।





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