देश में हर चार मिनट में कोई एक अपनी जान दे देता है और ऐसा करने वाले तीन लोगों में से एक युवा होता है। यानि देश में हर 12 मिनट में 30 वर्ष से कम आयु का एक युवा अपनी जान ले लेता है। ऐसा कहना है राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो का। रिकार्ड मुताबिक, 2009 में कुल 1,27,151 लोगों ने आत्महत्या की, जिनमें 68.7 प्रतिशत 15 से 44 वर्ष की उम्र वर्ग के थे, जबकि 34.5 प्रतिशत की उम्र 15 से 29 साल के बीच थी, जबकि 34.2 प्रतिशत की उम्र 30 से 44 साल के बीच थी। दिल्ली और अरुणाल प्रदेश में आत्महत्या करने वालों में 55 प्रतिशत से ज्यादा 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के थे। रिकार्ड के मुताबिक, देश में रोज 223 पुरुष और 125 महिलाएं आत्महत्या करती हैं। इनमें 73 लोग बीमारी के कारण और 10 लोग प्यार-मोहब्बत के चक्कर में आत्महत्या करते हैं। मामलों में 1.7 फीसदी की बढ़ोतरी : 009 में आत्महत्या के मामलों में 1.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 2008 में आत्महत्या के 1,22,902 मामले थे जो 2009 में बढ़कर 1,27,151 हो गए हैं। यदि 1999 से तुलना करें तो 2009 में आत्महत्याओं की संख्या में 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। 1999 में आत्महत्या करने वालों की संख्या 1,10,587 थी जो 2009 में बढ़कर 1,27,151 हो गई। पश्चिम बंगाल अव्वल : 2009 में सबसे ज्यादा आत्महत्याएं पश्चिम बंगाल में हुईं। वहां एक साल में 14,648 लोगों ने अपनी जान ले ली। उसके बाद आंध्र प्रदेश का स्थान है जहां 14,500 लोगों ने अपनी जान दे दी। फिर नंबर आता है तमिलनाडु (14,424), महाराष्ट्र (14,300) और कर्नाटक (12,195) का। इन पांच राज्यों में आत्महत्या करने वालों की कुल संख्या देश में आत्महत्या करने वालों की कुल संख्या का 55.1 प्रतिशत है। दक्षिण भारत के राज्यों आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल को मिलाकर देश में कुल आत्महत्या का 32.2 प्रतिशत इन्हीं राज्यों में होता है। 2009 में दिल्ली में 1,477 लोगों ने आत्महत्या की। वहीं उत्तर प्रदेश में आत्महत्या करने वालों की संख्या काफी कम रही। देश की 16.7 प्रतिशत जनसंख्या वाले राज्य में आत्महत्याओं का प्रतिशत केवल 3.3 रहा। पारिवारिक वजह मुख्य कारक : आत्महत्या के कारणों में पारिवारिक परेशानियां और बीमारियां सबसे ऊपर हैं। देश में 23.7 प्रतिशत लोग पारिवारिक परेशानी और 21 प्रतिशत बीमारियों के कारण आत्महत्या करते हैं। प्यार-मोहब्बत के चक्कर में सिर्फ 2.9 प्रतिशत और दहेज झगड़ों, ड्रग्स और गरीबी के कारण 2.3 प्रतिशत लोग आत्महत्या करते हैं। पुरुष सामाजिक और आर्थिक परेशानियों के कारण, जबकि महिलाएं व्यक्तिगत और भावनात्मक कारणों से आत्महत्या करती हैं। 2009 में बेरोजगारी और व्यावसायिक परेशानियों के कारण आत्महत्या करने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। इन कारणों से क्रमश: 18.8 तथा 15.1 प्रतिशत लोगों ने आत्महत्या की। जहर खाने की प्रवृत्ति सबसे ज्यादा : यह भी देखा गया कि केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में आत्महत्या करने वालों में से 54.7 प्रतिशत 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के थे। 2009 में कुल 2,951 बच्चों ने आत्महत्या की जिनमें से 54.5 प्रतिशत मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और तमिलनाडु में हैं। आत्महत्या करने वालों में 33.6 प्रतिशत ने जहर खाकर, 31.5 प्रतिशत ने फांसी लगाकर, 9.2 प्रतिशत ने आत्मदाह करके और 6.1 प्रतिशत ने डूबकर जान दी। देश के 35 बड़े शहरों में हुई आत्महत्याओं में से 43.3 प्रतिशत आत्महत्याएं चार बड़े शहरों बेंगलूर, चेन्नई, दिल्ली और मुंबई में हुईं।
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